संत कबीरदास के दोहे-मित्रता से भक्ति और सत्संग में बाधा आती है (bhakti aur satsang-kabir das ji ke dohe)


दुनिया सेती दोसती, होय भजन के भंग
एका एकी राम सों, कै साधुन के संग।।
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि दुनिया के लोगों के साथ मित्रता बढ़ाने से भगवान की भक्ति में  बाधा आती है। एकांत में बैठकर भगवान राम का स्मरण करना चाहिये या साधुओं की संगत करना चाहिए तभी भक्ति प्राप्त हो सकती है।
ऊजल पहिनै कापड़ा, पान सुपारी खाय
कबीर गुरु की भक्ति बिन, बांधा जमपुर जाय।।
संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि लोग साफ-सुथरे कपड़े पहन कर पान और सुपारी खाते हुए जीवन व्यतीत करते हैं। गुरु की भक्ति के बिना उनका जीवन निरर्थक व्यतीत करते हुए मृत्यु को प्राप्त होते हैं
वर्तमान संदर्भ में सम्पादकीय  व्याख्या-भक्ति लोग अब जोर से शोर मचाते हुए कर रहे हैं। मंदिरों और प्रार्थना घरों में फिल्मी गानों की तर्ज पर भजन सुनकर लोग ऐसे नृत्य करते हैं मानो वह भगवान की भक्ति कर रहे हैं। समूह बनाकर दूर शहरों में मंदिरों में स्थित प्रतिमाओं के दर्शन करने जाते हैं। जबकि इससे स्वयं और दूसरों को दिखाने की भक्ति तो हो जाती है, पर मन में संतोष नहीं होता। मनुष्य भक्ति करता है ताकि उसे मन की शांति प्राप्त हो जाये पर इस तरह भीड़भाड़ में शोर मचाते हुए भगवान का स्मरण करना व्यर्थ होता है क्योंकि हमारा ध्यान एक तरफ नहीं लगा रहता। सच तो यह है कि भक्ति और साधना एकांत में होती है। जितनी ध्यान में एकाग्रता होगी उतनी ही विचारों में स्वच्छता और पवित्रता आयेगी। अगर हम यह सोचेंगे कि कोई हमारे साथ इस भक्ति में सहचर बने तो यह संभव नहीं है। अगर कोई व्यक्ति साथ होगा या हमारा ध्यान कहीं और लगेगा तो भक्ति भाव में एकाग्रता नहीं आ सकती। अगर हम चाहते हैं कि भगवान की भक्ति करते हुए मन को शांति मिले तो एकांत में साधना का प्रयास करना चाहिए।
कहने का अभिप्राय यह है कि भक्ति और सत्संग का मानसिक लाभ तभी मिल सकता है जब उसे एकांत में किया जाये। अगर शोर शराबे के साथ भीड़ में भक्ति या भजन गायेंगे तो फिर न केवल अपना ध्यान भंग होगा बल्कि दूसरे के कानों में भी अनावश्यक कटु स्वर का प्रसारण करेंगे। 
————————————–

संकलक, लेखक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://anant-shabd.blogspot.com
———————— 
यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द लेख पत्रिका
2.शब्दलेख सारथि
3.दीपक भारतदीप का चिंतन

Advertisements
Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

टिप्पणियाँ

  • arjun singh  On 01/05/2011 at 12:59

    kabir is my best writer

  • aayushi  On 18/11/2011 at 17:38

    thanx…..for the support..!!!
    bt u should give additionalinfo about the dohas n a choice box…..!!!!!

  • ragarajan  On 30/12/2011 at 17:58

    tell us more about what kabir said about friendship

  • nimish yadav  On 31/05/2012 at 16:15

    leave more dohas of sant kabir on trhis page only………………. !!!!!!!!!!

  • nimish yadav  On 31/05/2012 at 16:22

    the placer should leave more dohas of the writer so people can open this page again and again…………….!!!!!!!!!!!!!!!

  • jitesh  On 21/06/2012 at 12:37

    he is the best

  • riya adlakha  On 01/07/2012 at 18:19

    plese can u give me 1 doha on mitrata pleeeeeeese

  • vini  On 24/09/2012 at 17:09

    please can u give me 1 doha on friend pleeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeesssssssssssseeeeeeeeeeee

  • sowmya  On 17/10/2012 at 17:54

    nice dhoas,but want more on friendship!

  • mayur  On 04/11/2012 at 06:48

    weelll done

  • Pratiksha  On 04/11/2012 at 12:47

    i wanted dohas on many topics. but there are not dohas which would help me. boooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooooo!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

  • susan  On 04/11/2012 at 18:06

    these dohas are very nice

  • xuang fuo  On 04/11/2012 at 18:11

    i like the dohas

  • ileana  On 16/11/2012 at 17:38

    there are no dohas which i want but they are good………

  • riya khurana  On 16/11/2012 at 17:45

    kabir is my one of the favourite writer.
    so,please give me one more Doha on friendship

  • tanvi  On 16/11/2012 at 22:16

    thank for my friend

  • gauri  On 18/12/2012 at 21:50

    good but need more dohe on friendship for project work

  • harsh  On 12/05/2013 at 09:42

    need more

  • harpreet chaudhary  On 12/10/2014 at 17:16

    can u give me five dohas on dosti

  • babulal vishnoi  On 11/11/2014 at 16:04

    God bless you and your business

  • anshul choudhary  On 24/01/2015 at 16:44

    on one can have mare than one or two real or best friends

  • Apurva sharma  On 19/06/2016 at 17:47

    mast hai jabardast hai dosti to ek ehsaas hai nas janne ki der hai

  • Apurva sharma  On 19/06/2016 at 17:48

    mast hai jabardast hai dosti to ek ehsaas hai bas janne ki der hai

  • premananda sahoo  On 06/10/2016 at 20:51

    i want 10 dohas
    fulllllllllllllllllllllllllllllllllllllllllllll

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: