Tag Archives: मित्रता

मज़े के खातिर-हिन्दी कविताएँ


क्यों हाथ बढ़ाएँ
उन डूबते लोगों के लिए
मरना जिन्होने तय कर लिया है,
दरिंदों की सोहबत जितना बुरा है
उन लोगों का साथ निभाना
जिन्होने थोड़े मज़े की खातिर
मुसीबतों से लड़ना आसान समझ लिया है।
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जो हाथ उठे हैं
हमेशा मांगने के लिए
वह किसी की उम्मीद नहीं बन सकते,
सेठ हो या भिखारी
जिनको प्यारी दौलत है
झूठ बोलते कभी नहीं थकते।
कवि, लेखक एवं संपादक-दीपक ‘भारतदीप’,ग्वालियर
hindi poet,writter and editor-Deepak ‘Bharatdeep’,Gwalior
http://dpkraj.blgospot.com
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कमीज और कफन में कमीशन-हिन्दी कविता (kamij aur kafan mein commision-hindi pooem


जिंदगी में दोस्ती और रिश्तों के चेहरे बदल जाते हैं,
कुदरत के खेल देखिये, नतीजे सभी में वही आते हैं।
कमीज पर क्या, कफन में भी कमीशन की चाहत है,
दवाई लेने के इंतजार मे खड़े, कब हम बीमारी पाते हैं।
हमारी खुशियों ने हमेशा जमाने को बहुत सताया है,
गम आया कि नहीं, यही जानने लोग घर पर आते हैं।
कहें दीपक बापू, भरोसा और वफा बिकती बाज़ार में
इंसानों में जिंदा रहे जज़्बा, यही सोच हम निभाये जाते हैं।
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कवि, लेखक और संपादक-दीपक “भारतदीप”,ग्वालियर 
poet, writer and editor-Deepak “BharatDeep”,Gwalior

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