नैतिकता और दलाली-हिन्दी हास्य कविता (natikta aur dalali-hindi hasya kavita)


शिक्षक ने बच्चों से कहा
‘‘हमारे देश पर प्रकृति की
बहुत बड़ी कृपा है,
यहां बरसात भी होती समय पर
तो सूरज भी तपा है,
एक तरफ हिमालय देता है पहरा,
तीन तरफ हिमालाय बांधे है सहरा,
सुरक्षा है चारों तरफ
इसलिये हमेशा ही यहाँ जन जन ने
भगवान का नाप जपा है।’’

सुनकर एक बालक बोला,
‘‘मगर मास्टर जी
मेरे दादाजी, पिताजी से कह रहे थे
कि ‘पहले तो होते थे देश में घोटाले
पर अब तो चारों तरफ  उनमें फंसा है,
देखो,
जो करते हैं दिन में  भ्रष्टाचार रोकने की बात, 

वही बुद्धिजीवी दलाली करने लगते होते  ही रात, 
हम  जैसे आम लोग उनके
शब्दों से नहीं  दलाली के काम  पर खफा हैं,
देश में बढ़ गया है पाप, चारों तरफ
तभी तक कोई  आदमी  ईमानदार दिखाई देता
जब तक घोटालों में नहीं नपा है,।”
————————-

कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com
————————

दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.अनंत शब्दयोग
3.दीपक भारतदीप की शब्दयोग-पत्रिका
4.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान पत्रिका
५.दीपक भारतदीप का चिंत्तन
६.ईपत्रिका
७.दीपक बापू कहिन
८.जागरण पत्रिका
९.हिन्दी सरिता पत्रिका

Advertisements
Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

टिप्पणियाँ

  • padmsingh  On 29/12/2010 at 15:59

    आपको लगता है आज प्राथमिक पाठशालाओं में ऐसी शिक्षा मिल रही है?
    ..तथापि रचना सुंदर बन पड़ी है,

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: