चमचागिरी से ही बन जाती है चाट-हिन्दी व्यंग्य कविताऐं (chamchagiri se ban jati hai chat-hindi satire poem)


जिंदगी में सफलता के लिये
अब पापड़ नहीं बेलने पड़ते हैं
  चमचागिरी से ही बन जाती है चाट
बस, बड़े लोगों की दरबार में हाज़िर होकर
उनकी तारीफ में चंद शब्द ठेलने पड़ते हैं ।
——-
 


महंगाई ने इंसान की नीयत को
सस्ता बना दिया है,
पांच सौ और हजार के नोट
छापने के फायदे हैं
इसलिये  बड़े नोट के सायों   ने
बदनीयत लोगों को खरीदकर
थोकबंद जमा कर दिया है।
——–
अपने हाथों से ही सजा देना अपनी छबि
इंसान खो चुके हैं पहचान अच्छे बुरे की।
अपने आप बन रहे सभी मियां मिट्ठू
तारीफों में परोसते बात ऐसी, जो लगे छुरे की।
——–

कवि, लेखक और संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior
http://dpkraj.blogspot.com

यह आलेख/हिंदी शायरी मूल रूप से इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान-पत्रिका’पर लिखी गयी है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन के लिये अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • NABIN  On 06/04/2012 at 11:10

    HI, I WANT SOME PAINFUL AND CHAMCHAGIRI TO THE BOSS FOR THEIR BENEFIT QUOTES………………..

  • budhpal singh  On 14/05/2013 at 09:51

    चमचागीरी एक अ़ंधा भी देख सकता और बहरा भी सुन सकता है

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