आशिक, माशुका और सच-हिंदी हास्य कविता (lover and truth-hindi hasya kavita


आशिक ने दोस्त से कहा
‘‘यार, सोचता हूं
सच की मशीन पर बैठकर
साक्षात्कार कराऊं।
वैसे भी कहा गया है कि
त्रिया चरित्र के बारे में कोई नहीं जानता
हर कोई अपने अनुमान को सही मानता
आजकल के घोर कलियुग में तो
कहना ज्यादा कठिन है
इसलिये सच पता करने का
यह पश्चिमी मार्ग अपनाऊं।’’
सुनकर दोस्त ने कहा
‘‘किस मूर्ख ने कहा है कि
सच के सामने की मशीन से
अपनी जिंदगी का प्रमाणपत्र पाओ
दोस्त! तुम जिस इश्क के चक्कर में हो
वह भी पश्चिमी मार्ग है
जिसमें आदमी और औरत चलते है
एक अकेले राही की तरह
चाहने वालों के नाम
स्टेशन की तरह बदल जाते हैं
फिर तुम कौन दूध के धुले हो
कहीं उसने कह दिया कि
तुम भी गर्म आसन (हाॅट सीट) पर
बैठकर अपना सच बताओ
तो फिर कहां जाओगे
झूठ बोलते पकड़े जाओगे
आओगे मेरे पास पूछने कि
‘रूठी प्रेयसी को कैसे मनाऊं।’
तब मेरा जवाब यही होगा कि
‘मैं खुद ही भुगत रहा हूं
तुम्हें रास्ता कहां से बताऊं।’’
…………………………………

लेखक के अन्य ब्लाग/पत्रिकाएं भी हैं। वह अवश्य पढ़ें।
1.दीपक भारतदीप की शब्द पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान-पत्रिका
4.अनंत शब्दयोग
कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप

Advertisements
Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

टिप्पणियाँ

  • anand kumar  On 30/04/2010 at 15:11

    nice poetry buddy
    padhkar laga ki log kaise shows aakar apne apne raaj ugalte hai ayda aise sach ka jo rishte aupar kya fr dilo ko tod jaate hai

  • shanke sharma  On 15/06/2010 at 11:34

    i love you

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: