कबीर के दोहे-दैहिक शिक्षा देने वाले शिक्षक अध्यात्मिक गुरू नहीं कहे जा सकते


पंख होत परबस पयों, सूआ के बुधि नांहि।
अंकिल बिहूना आदमी, यौ बंधा जग मांहि।।

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं बुद्धिमान पक्षी जिस तरह पंख होते हुए भी पिंजरे में फंस जाता है वैसे ही मनुष्य भी मोह माया के चक्क्र में फंसा रहता है जबकि उसकी बुद्धि में यह बात विद्यमान होती है कि यह सब मिथ्या है।

शब्द गुरु का शब्द है, काया का गुरु काय।
भक्ति करै नित शब्द की, सत्गुरु यौं समुझाय।।

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो गुरु जीवन रहस्यों का शब्द ज्ञान दे वही गुरु है। जो गुरु केवल भौतिक शिक्षा देता है उसे गुरु नहीं माना जा सकता। गुरु तो उसे ही कहा जा सकता है जो भगवान की भक्ति करने का तरीका बताता है।
वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-वर्तमान शिक्षा पद्धति में विद्यालयों और महाविद्यालयों में अनेक शिक्षक छात्रों को अपनी अपनी योग्यता के अनुसार पाठ्यक्रमों का अध्ययन कराते हैं पर उनको गुरु की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। वर्तमान शिक्षा के समस्त पाठयक्रम केवल छात्र को नौकरी या व्यवसाय से संबंधित प्रदान करने के लिये जिससे कि वह अपनी देह का भरण भोषण कर सके। अक्सर देखा जाता है कि उनकी तुलना कुछ विद्वान लोग प्राचीन गुरुओं से करने लगते हैं। यह गलत है क्योंकि भौतिक शिक्षा का मनुष्य के अध्यात्मिक ज्ञान से कोई संबंध नहीं होता।
उसी तरह देखा गया गया है कि अनेक शिक्षक योगासन, व्यायाम तथा देह को स्वस्थ रखने वाले उपाय सिखाते हैं परंतु उनको भी गुरुओं की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। हां, ध्यान और भक्ति के साथ इस जीवन के रहस्यों का ज्ञान देने वाले ही लोग गुरु कहलाते हैं। तात्पर्य यह है कि जिनसे अध्यात्मिक ज्ञान मिलता है उनको ही गुरु कहा जा सकता है। वैसे आजकल तत्वज्ञान का रटा लगाकर प्रवचन करने वाले भी गुरु बन जाते हैं पर उनको व्यापारिक गुरु ही कहा जाना चाहिये। सच्चा गुंरु वह है जो निष्काम और निष्प्रयोजन भाव से अपने शिष्य को अध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है।
……………………………….

यह पाठ मूल रूप से इस ब्लाग‘दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका’ पर लिखा गया है। अन्य ब्लाग
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संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप

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टिप्पणियाँ

  • bipin bhatt  On 14/07/2009 at 12:46

    hi.muje kabeer das ke dohe bahut aacche lagte hai . aur yahan tak ki nane kabeer das ke dohe se mary jindagi me bahut kucha sikne ko mila .phir bhi me kabi kabi aapni parai(study) nahi kar pata ,me uljhan me par jata .muje kuch batae jis se me apni parai achi tarha se karun.

  • luni  On 24/09/2009 at 14:05

    Namaste,actualy i m studying in chennai, and project, assigment are part of my study in my institution. I m doing a stuying on kabir ji.toh main chahti thi ki aapka website kisi tarah se mujhe help kare. mujhe kabir ji ke dohe aur translation chahiye the. agar isme kisi tarah ka madat mil jaye to apke bahot abhari honge.

  • vishnu  On 13/05/2012 at 11:14

    superb

  • shivam verma  On 07/07/2012 at 12:51

    i am studying in central academy indra nagar . kabir das is very good author and his famous books r so good & he his so good.

  • Vivek kumar singh  On 02/08/2012 at 08:32

    Kabir ke dohe mere liye bahut pasand hai inhe dowload karne ki agar koi wapsite ho to mere email par comment jarur karna.

  • diya  On 08/09/2012 at 17:46

    mujhe yeh padkar bahut acha laga. mein ek +2 student hoom aur meimne second language hindi chuna hai. mujhe lagtha hai hindi ache se padne keliye hindi movies aur programmes dekhni chahiye

  • fdgh  On 14/09/2012 at 21:15

    i liked it very much

  • fdgh  On 14/09/2012 at 21:17

    superbtofantabulaslyfantastic

  • nandan joshi  On 26/10/2012 at 18:48

    yah muje padai ma bhaut kam aya h

  • taha  On 19/12/2012 at 20:37

    hi
    mene kabir ko 3 saal padha muje bahut achha laga meri life me uske hisaab bahut fark aaya aur aaj tak muje uske kai dohe yaad hai

  • madhav  On 29/12/2012 at 16:17

    wonderful!!!!!!!!!!!!!!!!

  • md saddan  On 20/01/2013 at 13:02

    mujhe kabit das jee k dohe bahut pasand h….
    aur hum in doho ko apne frndzz par kav kab use v krte h…
    hahaha;)

  • jay  On 08/06/2016 at 11:09

    mujhe kabir ki visheshta chahiye hein na ki kabir ke dohe

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