दूसरे के घर में लगी आग पर हाथ तापने का प्रयास-आलेख


कुछ लोग हैं जो महिलाओं को अपने पुरुषों के अनाचारों के विरुद्ध भड़काते रहते हैं। यह मामला दायर कर दो। वह दायर कर दो। तमाम तरह के कानून बताते हैं। यह सत्य है कि भारत में महिलाओं पर अत्याचार अब अधिक बढ़ गये हैं बनस्बित पहले के । सरकार ने इसलिये कानून भी कई बनाये हैं ताकि महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल सके। मगर साथ ही यह भी देखा गया है कि कुछ महिलायें उनकी आड़ में अधिक अहंकार पाल लेती हैं और पारिवारिक विवादों में अपनी जिठानी या सास पर विजय पाने के लिये जेठ,ससुर और ननद का नाम पुलिस या न्यायालय में लिखा देती हैं। इस कारण कई सभ्य लोगों को भारी जिल्लत का सामना करना पड़ता है।

कई बार तो यह देखा गया है कि सास ससुर और जेठ जिठानी अलग रहते हैं और कभी कभार घर जाते हैं उस पर भी जब महिला की अपने पति से नहीं बनती या झगड़ा होता है तो वह बाकी रिश्तेदारेां के नाम पर बिना किसी कारण के न्यायालय में मुकदमा या पुलिस में रिपोर्ट कर देती है। ऐसे में उन लोगों को भारी परेशानी अकारण झेलना पड़ती है। इस बात पर ही सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्यान दिया है। इस मामले में एक निर्णय में कहा भी गया है कि असफल विवाहों पर दहेज एक्ट नहीं लगाया जाना चाहिये।
ऐसे मामले में पीड़िता महिलाओं की ऐसी शिकायतों सामान्य रूप से रहती हैं कि पति, जेठ और ससुर ने मारा। खाना नहीं दिया। खर्चा नहीं दिया। यह शिकायतों की एकरूपता भी संदेह का कारण बनती है। अपने प्रति दूसरे के मार्मिक भाव पैदा करने के लिये इस तरह की शिकायतें की जाती हैं।

कभी कभी तो लगता है कि जिन महिलाओं को कानून के सहारे की जरूरत है वह कभी वहां नहीं जाती बल्कि जिनको अपने महिला होने का अहंकार है वही इन मामलों को आगे ले जाती हैं। हैरानी की बात तो यह है कि अनेक लोग महिलाओं को न्याय न मिलने पर कभी पुलिस तो कभी माननीय न्यायालय पर आक्षेप करने लगते हैं जबकि यह भूल जाते हैं कि पुलिस और माननीय न्यायाधीश अपनी अनुभवी आंखों से परिस्थितियों का बहुत करीब से अध्ययन करते हैं और उनको वह सब चीजें दिखाई देती हैं जिनको बाहर बैठे लोग देख नहीं पाते। यही कारण है कि अनेक बार पुलिस झूठी शिकायत और न्यायाधीश कमजोर मुकदमें पर उसी के अनुसार कार्यवाही करते हैं। जहां महिला के अनुकूल फैसला हुआ वहां तो ठीक जहां नहीं हुआ तो हमारे कथित बुद्धिजीवी उस पर हाहाकार मचाते हैं।

ऐसे में कुछ महिला बुद्धिजीवी जब कथित पीड़ित महिलाओं के पक्ष में नारे लगाते हुए उनको आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करती हैं तब यह कहने का मन होता है कि ‘भई, क्या तुम्हारे घर में पति, भाई, या कोई पुरुष सदस्य नहीं है जो दूसरे का घर बिगाड़ रही हो।’
जब कोई पुरुष बुद्धिजीवी ऐसा करे तो उससे क्या कहें। यही न! कि क्या तुम्हारे घर में भाभी, बहु या अन्य नारी नहीं है जिससे तुम्हें खतरा हो जो ऐसी बात कर रहे हो?’
हम तो उन लोगों में है जो मानते हैं कि पारिवारिक और सामाजिक मामलों में कानून का हस्तक्षेप जितना भी कम हो उतना ही अच्छा! इन कानूनों ने उन लोगों को कितनी जलालत झेलनी पड़ती है जिनका ऐसे मामलों से कोई लेनादेना नहीं होता। सच बात तो यह है कि आजकल के भौतिक युग में लोगों की आवश्यकतायें बहुत बढ़ गयी हैं। जिनके पास पैसा है उनका तो कुछ नहीं हैं पर जिनके पास धन की कमी है उनके लिये जीवन कितना कष्टमय हो जाता है यह उसे वही जानते हैं जो भुक्तभोगी या उनके करीबी रहे हों। धन की अल्पता और आवश्यकताओं के बीच पुरुष किस तरह पिसता है इसे कोई नहीं समझता। ऐसे में अगर उसकी पत्नी विद्रोह कर जाये तो बिचारा कहां जाये? सच बात तो यह है कि धन की अल्पता या पद का छोटा होने से पुरुष कहीं भी सम्मानित नहीं होता। यहां तक कि अपने घर में भी नहीं। वैसे तो धनी और बड़ा आदमी भी अपने घर में सम्मानित नहीं होता पर बाहर उसका सम्मान तो होता है गरीब आदमी तो बिचारा दोनों जहां से गया। तिस पर यह बुद्धिजीवी और समाज सेवक छोटी मोटी शिकायतों पर उसे निशाना बनाने को तैयार रहते हैं। आजकल की महिलायें दूसरों का आकर्षण देखकर अपने पुरुष को ताने देती हैं उसे कौन सुनता है।
हम अपने दर्शन की बात करें तो उसका सीधा कहना है कि पति और पत्नी का रिश्ता केवल वही समझ सकते हैं जो निभा रहे हैं। तीसरे को न तो उसमें टांग फंसाना चाहिये और ही फैसला कराने जाना चाहिये। जो औरतें कहती हैं कि ‘अमुक स्त्री पर अनाचार हो रहा है’ वह यह नहीं बताती कि उसके पति का व्यवहार कैसा है? अगर वह बतायेगी तो उसका पति भी दस जगह बतायेगा। सो उसकी स्वयं की भी बदनामी होगी।
यही हाल पुरुष का है। वह अगर यह कहे कि वह अपनी पत्नी पर अनाचार नहीं करता तो पड़ौसी बता देंगे। सो अपने दावे प्रतिदावे से सभी दूर रहकर दूसरे के घर की आग पर अपने हाथ तापना चाहते हैं।

सच बात तो यह है कि अनेक मामले इस बात की पुष्टि करते हैं जिसमें महिला कानूनों का अनेक महिलाओं ने दुरुपयोग केवल परिवार अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिये किया। इससे उन लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी जिनका मामले से कोई लेनोदेना नहीं था।
…………………………………..

Advertisements
Post a comment or leave a trackback: Trackback URL.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: