दर्द का न होता नामोनिशान-कविता


अपने दर्द को लेकर
सब हैं परेशान
जिसके सामने बयान करें
वही अपनी हालातों से है हैरान
अपनी कहानी सबको सुनाते
पर कोई नहीं देता कान
हर कोई दवा अपने लिये ढूंढता
भीड़ में आदमी हो जाता अकेला
भरा हुआ घर लगता है वीरान

जो सीख लेता हमदर्दी तो
क्यों इलाज के लिये भटकता इंसान
कोई दूसरा इलाज करे
यह हर कोई चाहता है
पर किसी का हमदर्द बनकर
सहारा बनने से कतराता है
अपना दर्द दूर करने के लिए
दूसरे की मुसीबतों पर मुस्कराता है
दो बोल अगर हमदर्दी के
बोलना सीख होता
कहीं हमदर्दी का पेड़ बोता
तो क्यों तरसा होता अपने दर्द के लिये
सभी बनते एक दूसरे का सहारा
दर्द का न होता नामोनिशान
………………………………..

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टिप्पणियाँ

  • sameerlal  On 11/06/2008 at 15:19

    बढ़िया भाव. लिखते रहिये.

  • ranjanabhatia  On 11/06/2008 at 16:12

    दर्द न हो तो ज़िंदगी क्या है 🙂 अच्छा लिखा है आपने

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