मन के समंदर में लहर और नाव का खेल


मन के समंदर में उठती लहरें
कई नाम है जो नाव की तरह
लहराते निकल जाते हैं
जिसका किनारा आ गया
वह साथ छोड़कर चला गया
वह लहरें भी रूप बदल देती
जिनके साथ वह खेल जाते हैं
एक लहर आती, एक नाव ले आती
उसके रुखसत होने के पहले ही
दूसरी उठती नजर आती
हर किसी का मन है समंदर
सबकी अलग अलग कहानी हैं
कुछ लहरों के साथ ही बहते
तो कुछ दृष्टा बनकर
लहर और नाव का खेल देखते जाते हैं
मन के समंदर में तैरते हैं बस नाम
हाथ में तो सबके किरकिरी नजर आती है
………………………….

दीपक भारतदीप

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टिप्पणियाँ

  • Alpana  On 08/06/2008 at 11:18

    Wah ! bahut sundar….kavita se kavita bani–yehi to hota hai….kavi ka man….aur uski kavitayee ki khaas baat!

    मन के समंदर में तैरते हैं बस नाम
    हाथ में तो सबके किरकिरी नजर आती है

    bahut hi achcha likha hai aapne…

  • azad  On 14/09/2008 at 15:02

    jis ka kinara aa gaya
    wonderfull

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