हमारी पोस्ट भी जोरदार पाओगे-हास्य कविता


रास्ते में टकरा गया फंदेबाज
और घूर-घूर कर देखता हूआ बोला-
‘दीपक बापू हाथ लगाकर
हमसे क्या छिपा रहे हो
हम देख रहे तुम फटी धोती
पहने चले जा रहे हो
क्या सड़क पर किसी को दिखाई
अपनी जोरदार ब्लागरी
या अंतर्जाल पर अपने ब्लोग में
किसी को अपनी पोस्ट लिखकर नाराज
कर दिया और कमेंट में पिटकर आ रहे हो

पहले झेंपे फिर गुर्रा कर बोले
‘‘कमबख्त तुम भी ऐसे प्रकट होते हो
जैसे हिट ब्लागरों के लिये
कमेंट लिखने वाले तैयार बैठे होते हैं
पर तुम भी आंखें बंद कर 
हमारी फटी पोस्ट (धोती) पर
ऐसी बेहूदा कमेंट लगा रहे हो
देखा नहीं अभी तो गिरकर जमीन से उठे हैं
मोटर सायकल वाला टक्कर मार गया
धोती किसी तरह बचा ली
वरना उसके साथ ही  चली गयी   होती
तब तो तुम्हारी कमेंट कुछ
और वजनदार हो गयी होती
ठीक है आज का दिन तुम्हारा रहा
मोटर सायकिलें तो
अभी और भी बढ़ेंगी
अभी तो छोटी कारें भी आ रही है
सड़कें तो और चौड़ी नही हो जायेंगी
तुम बिना हेल्मेट के
मोटर सायकल पर घूमते हो
कहते है तो मानते नहीं
वह दिन भी आयेगा
जब तुम इन्हीं सड़कों पर
मोटर सायकिल लेकर
पैदल उसे घसीटते नजर आओगे
तब हमारी पोस्ट भी जोरदार पाओगे
फिर हमसे मत कहना कि
हमारी बदहाली पर क्यों हंसे जा रहे हो
……………………………………………………….

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टिप्पणियाँ

  • atulkumaar  On 15/04/2008 at 17:10

    जब तुम इन्हीं सड़कों पर
    मोटर सायकिल लेकर
    पैदल उसे घसीटते नजर आओगे
    तब हमारी पोस्ट भी जोरदार पाओगे
    बहुत खूब.

  • राज भाटिया  On 15/04/2008 at 18:54

    दीपक बाबु खुब मोटर सायकिल पेल रहे हॊ,भाई जरा ध्यान से, भई हमारी ्तो एट्लस की साईकिल हे सन ५६ की.

  • sameerlal  On 16/04/2008 at 01:45

    🙂

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