‘तुम्हारे भाग्य में हिट ब्लागर होना नहीं लिखा’-हास्य व्यंग्य


ब्लागर अपने घर पर सो रहा था कि दूसरा ब्लागर आ पहुंचा। उसने घंटी बजाई तो गृहस्वामिनी ने दरवाजा खोला। दूसरे ब्लागर ने पूछा-‘‘क्या ब्लागर महोदय घर में है।

गृहस्वामिनी ने कहा-‘‘सो रहे है।’’

‘‘कमाल है ब्लागर होकर दिन में सोते है?’’दूसरे ब्लागर ने कहा

तब तक पहला ब्लागर दरवाजे पर आ गया और बोला-‘‘तुमने क्या ब्लागरों के लिये सोने या जागने के नियम बनाये हैं जो कहते हो कि‘ कमाल है ब्लागर होकर दिन में सोते है?’

गृहस्वामिनी ने दूसरे ब्लागर से कहा-‘‘आप अंदर आ जाईये।’’

पहले ब्लागर ने कहा-‘‘अगर तुमने कुछ नियम बनाये हों तो उसमें यह भी जोड़ दो कि ब्लागरों को दिन में भरी दोपहरिया में किसी के घर नहीं जाना चाहिए।’’

दूसरे ब्लागर ने कहा-‘तुम भी कैसी बात करते हो। इतनी समझ तो तुम में होना चाहिए कि नियम अपने फायदे के लिये बनाये जाते हैं।आजकल अपने आसपास बहुत से कार वाले हैं जिसे बाहर जाते देखते हैं उसी के साथ चिपक जाते हैं। यह कायदा तुम जैसे फ्लाप ब्लागरों के लिये ठीक है जिनका कोई पूछता नहीं है। अपनी तो इज्जत है।’’

पहले ब्लागर ने पूछा-‘‘आज किसके साथ कार में चिपक कर आये हो?‘‘

दूसरा ब्लागर-‘‘अरे वह मेरे पड़ौस में एक किराने वाला है उसका लड़का बीमार है वह निकल रहा था तो मेरे पूछने पर बताया कि तुम्हारी कालोनी में डाक्टर रहता है उसे दिखाने जा रहा है तो मैंने कहा कि ‘पड़ोसी का धर्म निभाते हुए मुझे भी चलना चाहिए।’ मैने सोचा तुमसे भी मिल लूं और पूछूं कि ‘तुम्हारे ब्लाग का भाव क्या चल रहा है?’’

पहला ब्लागर सतर्क हो गया और बोला-‘‘इसका क्या मतलब?’’

दूसरा ब्लागर-‘‘हमने तुम्हारी वह पोस्ट देखी थी जिसमें तुमने अपने सभी ब्लागों की रेट छापी थी। हमने तो वह पोस्ट भी देखी थी जिसमें तुम्हारे एक ब्लाग की रेटिंग बहुत खराब थी। हमने सोचा बहुत दिन हो गये चलकर पता करें कुछ तुम्हारे ब्लागों ने कुछ तरक्की की है कि नहीं।’’

दूसरा ब्लागर-‘‘मेरी छोड़ो अपनी कहो। तुम्हारे ब्लाग किस हालत में हैं, जरा इस पर भी रोशनी डालो। क्या अभी तक छद्म नाम से अभद्र कमेंट कर काम चला रहे हो?’’

दूसरा ब्लागर-‘‘हम तो प्रसिद्ध ब्लागर हैं, देख नहीं रहे। सब लोग कैसे इज्जत करते हैं? आजकल प्रचार का जमाना है। दो चार चीजें लिखो और बस प्रचार करो। तुम्हारी तरह नहीं कि बस लिखे जा रहे हैं और बिना किसी कारण के अघोषित सामाजिक बहिष्कार किये बैठे हैं? कहो तो तुम्हारे ब्लागों की रेट और रेटिंग बढ़ा दूं। हां, खर्चा होगा। मुझे कुछ दो या मेरे लिये कुछ अच्छा अपने ब्लाग पर लिखो तो तुम्हारा नाम अखबारों में छपवा दूंगा। बस हो जाओंगे हिट!’

तब तक गृहस्वामिनी पानी के ग्लास और प्लेट में बिस्कुट लेकर आयीं और बोलीं-‘‘भाई साहब, बिस्कुट लीजिये और फिर पानी पीजिये। बहुत गर्मी में आये हैं।’’

पहला ब्लागर-‘‘गर्मी में कहां यह तो कार में आया है। अपने पड़ौसी के साथ उसके लड़के को डाक्टर को दिखाने के बहाने या तफरी करने आया है।’’
गृहस्वामिनी ने कहा-‘‘हां, पर गर्मी में कुछ पैदल तो चलना पड़ा होगा न!’’

वह चली गयी तो दूसरा ब्लागर बोला-‘‘तुम अगर बाज आते तो मैं तुम्हारे ब्लाग की रेट और रेटिंग मैं ऐसे ही बड़ा देता। तुम कभी भी मेरे से सीधे मूंह बात नहीं करते इसलिये आज तक फ्लाप हो।’

पहला ब्लागर-‘‘तुमने अपनी अभद्र कमेंट से मेरा मूंह टेढ़ा कर दिया है कि अब वह सीधा होता ही नहीं। हां हम फ्लाप ब्लागर है यह ठीक पर यह तो बताओ यार तुम अपने ब्लाग पर लिखते क्या हो और उनकी रेटिंग और रेट क्या है?’’

दूसरा ब्लागर पानी का ग्लास पीने के बाद टेबल पर रखता हुआ बोला-‘‘हम सुपर क्लास ब्लागर हैं लिखते कम दिखते अधिक हैं इसलिये हमारी रेटिंग और रेट तय कोई और नहीं हम स्वयं ही तय करते हैं।’

पहला ब्लागर-‘‘ठीक तो क्या तय किया है?’’
दूसरा ब्लागर-‘‘तुम तो अपनी कहो। क्या तुम्हें अपने ब्लाग की रेटिंग और रेट बढ़वानी है? कुछ खर्चा पानी करो तो फिर सोचूं?’’

पहला ब्लागर-‘‘क्या करोगे?’’
दूसरा ब्लागर-‘‘अपने सभी ब्लाग पर तुम्हारे ब्लाग की रेट और रेटिंग बढ़ा-चढ़ा कर लिख दूंगा और फिर अखबारों में उसकी कटिंग भेज दूंगा। अरे, इतने सारे अखबार हैं कोई तो छाप देगा। बस हो जायेगा तुम्हारा नाम।’’

पहला ब्लागर-‘‘यह काम तो मैं स्वयं भी कर सकता हूं।’’
दूसरा ब्लागर-’आत्मप्रचार को अखबार नहीं छापते। मैं तुम्हारे नाम से लिखूंगा तो छप जायेगा। हां, तुम मेरे लिये अखबार में लिखने की बात कर बदला चुकाने की बात नहीं करना। इसके लिये मैने अपने एक रिश्तेदार को तैयार कर लिया है।’

पहला ब्लागर बोला-‘‘मेरे ख्याल से तुम अपने लिये यह तरीका आजमा कर देख लो फिर सोचूंगा।’’

दूसरा ब्लागर-‘‘तुम समझे नहीं। तुम मुझे कुछ खर्चपानी दोगे तो मैं अपने प्रचार करने वाले आदमी को दूंगा। तुम्हारे लिये तो मैं वैसे ही काम करूंगा।’’

पहले ब्लागर ने कहा-‘अब समझा! तुम भरी दोपरहिया में ब्लाग का धंधा करने निकले हो और मैं तुम्हारे लिये ग्राहक हूं।’’

दूसरा ब्लागर-‘‘अरे, यार तुम हमेशा उल्टी बात करते हो इसलिये फ्लाप हो।’’
पहला ब्लागर गुस्से में बोला-‘‘तुम बहुत हिट हो। माना, यह तो बताओ लिखते क्या हो?’’
तब तक बाहर से कार के हार्न की आवाज अंदर सुनाई दी तो दूसरा ब्लागर बोला-‘‘मेरे चलने का समय हो गया। वह पड़ौसी अपने लड़के को डाक्टर को दिखाकर आ गया है। अब मैं चलता हूं तुम्हारे भाग्य में हिट ब्लागर होना नहीं लिखा है।’’

पहला ब्लागर हंस पड़ा। दूसरा ब्लागर जाते-जाते बोला-‘‘पर हां, इस ब्लागर मीट पर रिपोर्ट जरूर लिख देना। जोरदार शीर्षक लगाना।’’
पहला ब्लागर बोला-‘‘क्या लिखूं ‘तुम्हारे भाग्य में हिट ब्लागर होना नहीं लिखा है।’’

दूसरा ब्लागर चला गया तो गृहस्वामिनी अंदर आयी और पूछा-‘‘ क्या बात हुई।’’

पहले ब्लागर ने हंसते हुए कहा-‘‘कुछ नहीं बस कह रहा था कि ‘तुम्हारे भाग्य में हिट ब्लागर होना नहीं लिखा है’, और इस पर रिपोर्ट लिखने के लिये कह रहा था।’
गृहस्वामिनी ने पूछा-‘‘इस बात का क्या मतलब।’’

पहले ब्लागर ने कहा-‘‘मैं खुद भी नहीं जानता, पर इस बार भी यह पूछना भूल गया कि इस पर हास्य कविता लिखना है कि नहीं। अगली बार पूछ लूंगा। इस बार भी हास्य आलेख से काम चलाना पड़ेगा।’’
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नोट-यह हास्य व्यंग्य रचना काल्पनिकम है तथा किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई लेनादेना नहीं है। अगर किसी की कारिस्तानी से मेल खा जाये तो वही इसके लिये जिम्मदार होगा। इसका लेखक ऐसे किसी भी दूसरे ब्लागर से नहीं मिला है।

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टिप्पणियाँ

  • चौराहा  On 12/04/2008 at 12:00

    बढ़िया लिखा पर थोड़ा लंबा हो गया। वो क्या है कि वेब का पाठक मज़ा (मज़ा से मतलब व्यंग्य) भी शॉर्टकट में लेना चाहता है। और अच्छी बात ये रही कि आपने भी अंत में डिसक्लेमर लिख कर सभी मुसीबतों से पिंड छुड़ाने की भरपूर चेष्टा की है। अच्छा है ब्लॉगरों की अंतर्कथा भी दुनिया पढ़े-जाने…

  • अतुल जी
    मैं जानता हूँ, इसलिए बहुत छोटे व्यंग्य लिखता हूँ हो सकता है संवादों की वजह से लाइन बदलने से लंबा दिखता हो , इसमें केवल शब्द ९५० के आसपास है. वैसे ब्लोगरों को समाज में एक व्यक्ति के रूप में स्थापित करने का प्रयास करते हुए ऐसे व्यंग्य लिखता हूँ और इसमें ब्लोग से हटकर भी कुछ लिखता हूँ.आपकी टिप्पणी के लिए आभार .
    दीपक भारतदीप

  • क्या अंदाज़े बयाँ है !

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