लिपस्टिक प्रेम-हिन्दी हास्य कविता (lipstic prem-hindi hasya kavita)


टीवी पर चल रही थी खबर
एक इंजीनियरिंग महाविद्यालय में
छात्रों द्वारा छात्राओं को होठों पर
लिपस्टिक लगाने की
तब पति जाकर उसकी बत्ती बुझाई।
इस पर पत्नी को गुस्सा आई।
वह बोली,
‘क्यों बंद कर दिया टीवी,
डर है कहीं टोके न बीवी,
तुम भी महाविद्यालय में मेरे साथ पढ़े
पर ऐसा कभी रोमांटिक सीन नहीं दिया,
बस, एक प्रेम पत्र में फांस लिया,
उस समय अक्ल से काम नहीं किया,
एक रुखे इंसान का हाथ थाम लिया,
कैसा होता अगर यह काम हमारे समय में होता,
तब मन न ऐसा रोता,
तुम्हारे अंदर कुंठा थी
इसलिये बंद कर दिया टीवी,
चालू करो इसमें नहीं कोई बुराई।’’

सुनकर पति ने कहा
‘देखना है तो
अपनी अपनी आठ वर्षीय मेरे साथ बाहर भेज दो,
फिर चाहे जैसे टीवी चलाओ
चाहे जितनी आवाज तेज हो,
अभी तीसरी में पढ़ रही है
लिपस्टिक को नहीं जानती,
अपने साथियों को भाई की तरह मानती,
अगर अधिक इसने देखा तो
बहुत जल्दी बड़ी हो जायेगी,
तब तुम्हारी लिपस्टिक
रोज कहीं खो जायेगी,
पुरुष हूं अपना अहंकार छोड़ नहीं सकता,
दूसरे की बेटी कुछ भी करे,
अपनी को उधर नहीं मोड़ सकता,
ऐसा कचड़ा मैं नहीं फैलने दे सकता
अपने ही घर में
जिसकी न मैं और न तुम कर सको धुलाई।’’
पत्नी हो गयी गंभीर
खामोशी उसके होठों पर उग आई।
———–

कवि लेखक एंव संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior

http://dpkraj.blogspot.com

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दीपक भारतदीप की शब्दयोग पत्रिका पर लिख गया यह पाठ मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसके कहीं अन्य प्रकाश की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • neelam  On 26/11/2010 at 17:17

    kash aap ki yeh lines read ker ke kal ma baap banney valey students ko yeh samejh aa jaaey ki vo kitney gelet hai

  • virendra ku.  On 31/12/2010 at 21:45

    it is the best way to grow awareness

  • vivek pandey  On 20/12/2011 at 16:21

    साहित्य संग्रह भारतीय साहित्य का इंटरनेट पर उपलब्ध सबसे बड़ा और सुव्यवस्थित संग्रह है। इसमें हिन्दी के अलावा और भी बहुत-सी भारतीय भाषाओं व बोलियों में रचा गया गद्य और पद्य उपलब्ध है। यह वेबसाइट देवनागरी यूनिकोड फ़ॉन्ट का प्रयोग करती है,

    साहित्य के इस संग्रह में आप भी अपना योगदान दे सकते है

    Sahitya Sangrah

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