समाज हिन्दी भाषा का महत्व समझे- हिन्दी दिवस पर विशेष चिंतन आलेख (hindi ka mahatva-hindi chitan lekh on hindi divas)


       सुना है अब इंटरनेट में लैटिन के साथ ही देवनागरी में भी खोज सुगम होने वाली है। यह एक अच्छी खबर है मगर इससे हिंदी भाषा के पढ़ने और लिखने वालों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ जायेगी, यह आशा करना एकदम गलत होगा। सच तो यह है कि अगर देवनागरी में खोज सुगम हुई भी तो भी इसी मंथर गति से ही हिंदी लेखन और पठन में बढ़ोतरी होगी जैसे अब हो रही है। हिंदी को लेकर जितनी उछलकूल दिखती है उतनी वास्तविकता जमीन पर नहीं है। सच कहें तो कभी कभी तो लगता है कि हम हिंदी में इसलिये लिख पढ़े रहे हैं क्योंकि अंग्रेजी हमारे समझ में नहीं आती। हम हिंदी में लिख पढ़ते भी इसलिये भी है ताकि जैसा लेखक ने लिखा है वैसा ही समझ में आये। वरना तो जिनको थोड़ी बहुत अंग्रेजी आती है उनको तो हिंदी में लिखा दोयम दर्जे का लगता है। वैसे अंतर्जाल पर हम लोगों की अंग्रेजी देखने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे है कि लोगों की अंग्रेजी भी कोई परिपक्व है इस पर विश्वास नहीं करना चाहिए-क्योंकि बात समझ में आ गयी तो फिर कौन उसका व्याकरण देखता है और अगर दूसरे ढंग से भी समझा तो कौन परख सकता है कि उसने वैसा ही पढ़ा जैसा लिखा गया था। बहरहाल अंग्रेजी के प्रति मोह लोगों का इसलिये अधिक नहीं है कि उसमें बहुत कुछ लिखा गया है बल्कि वह दिखाते हैं ताकि लोग उनको पढ़ालिखा इंसान समझें।
       ‘आप इतना पढ़ें लिखें हैं फिर भी आपको अंग्रेजी नहीं आती-‘’हिंदी में पढ़े लिखे एक सज्जन से उनके पहचान वाले लड़के ने कहा’‘-हमें तो आती है, क्योंकि अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हैं न!’
          मध्यम वर्ग की यह नयी पीढ़ी हिंदी के प्रति रुझान दिखाने की बजाय उसकी उपेक्षा में आधुनिकता का बोध इस तरह कराती है जैसे कि ‘नयी भारतीय सभ्यता’ का यह एक  प्रतीक हो। इनमें तो कई ऐसे हैं जिनकी हिंदी तो  गड़बड़ है साथ  ही  इंग्लिश भी कोई बहुत अच्छी  नहीं है।
       जैसे जैसे हिंदी भाषी क्षेत्रों में सरकारी क्षेत्र के विद्यालयों और महाविद्यालयों के प्रति लोगों का रुझान कम हुआ है-निजी क्षेत्र में अंग्रेजी की शिक्षा का प्रसार बढ़ा है। एक दौर था जब सरकारी विद्यालयों में प्रवेश पाना ही एक विजय समझा जाता था-उस समय निजी क्षेत्र के छात्रों को फुरसतिया समझा जाता था। उस समय के दौर के विद्यार्थियों ने हिंदी का अध्ययन अच्छी तरह किया। शायद उनमें से ही अब ऐसे लोग हैं जो हिंदी में लेखन बेहतर ढंग से करते हैं। अब अगर हिंदी अच्छे लिखेंगे तो वही लोग जिनके माता पिता फीस के कारण अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों में नहीं पढ़ा सकते और सरकारी विद्यालयों में ही जो अपना भविष्य बनाने जाते हैं।
       एक समय इस लेखक ने अंग्रेजी के एक प्रसिद्ध स्तंभकार श्री खुशवंत सिंह के इस बयान पर विरोध करते हुए एक अखबार में पत्र तक लिख डाला‘जिसमें उन्होंने कहा था कि हिंदी गरीब भाषा है।’
       बाद में पता लगा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा बल्कि उनका आशय था कि ‘हिन्दुस्तान में हिंदी गरीबों की भाषा है’। तब अखबार वालों पर भरोसा था इसलिये मानते थे कि उन्होंने ऐसा कहा होगा पर अब जब अपनी आंखों के सामने बयानों की तोड़मोड़ देख रहे हैं तो मानना पड़ता है कि ऐसा ही हुआ होगा। बहरहाल यह लेखक उनकी आलोचना के लिये अब क्षमाप्रार्थी है क्योंकि अब यह लगने लगा है कि वाकई हिंदी गरीबों की भाषा है। इन्हीं अल्पधनी परिवारों में ही हिंदी का अब भविष्य निर्भर है इसमें संदेह नहीं और यह आशा करना भी बुरा नहीं कि आगे इसका प्रसार अंतर्जाल पर बढ़ेगा, क्योंकि यही वर्ग हमारे देश में सबसे बड़ा है।
       समस्या यह है कि इस समय कितने लोग हैं जो अब तक विलासिता की शय समझे जा रहे अंतर्जाल पर सक्रिय होंगे या उसका खर्च वहन कर सकते हैं। इस समय तो धनी, उच्च मध्यम, सामान्य मध्यम वर्ग तथा निम्न मध्यम वर्ग के लोगों के लिये ही यह एक ऐसी सुविधा है जिसका वह प्रयोग कर रहे हैं और इनमें अधिकतर की नयी पीढ़ी अंग्रेजी माध्यम से शिक्षित है। जब हम अंतर्जाल की बात करते हैं तो इन्हीं वर्गों में सक्रिय प्रयोक्ताओं से अभी वास्ता पड़ता है और उनके लिये अभी भी अंग्रेजी पढ़ना ही एक ‘फैशनेबल’ बात है। ऐसे में भले ही सर्च इंजिनों में भले ही देवनागरी करण हो जाये पर लोगों की आदत ऐसे नहीं जायेगी। अभी क्या गूगल हिंदी के लिये कम सुविधा दे रहा है। उसके ईमेल पर भी हिंदी की सुविधा है। ब्लाग स्पाट पर हिंदी लिखने की सुविधा का उपयेाग करते हुए अनेक लोगों को तीन साल का समय हो गया है। अगर हिंदी में लिखने की इच्छा वाले पूरा समाज होता तो क्या इतने कम ब्लाग लेखक होते? पढ़ने वालों का आंकड़ा भी कोई गुणात्मक वुद्धि नहीं दर्शा रहा।
       गूगल के ईमेल पर हिंदी लिखने की सुविधा की चर्चा करने पर एक नवयौवना का जवाब बड़ा अच्छा था-‘अंकल हम उसका यूज (उपयोग) नहीं करते, हमारे मोस्टली (अधिकतर) फ्रैंड्स हिंदी नहीं समझते। हिंदी भी उनको इंग्लिश (रोमन लिपि) में लिखना पसंद है। सभी अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हैं। जो हिंदी वाले भी हैं वह भी इससे नहीं लिखते।’
ऐसे लोगों को समझाना कठिन है। कहने का तात्पर्य यह है कि हिंदी की कितनी भी सुविधा अंतर्जाल पर आ जाये उसका लाभ तब तक नहीं है जब तक उसे सामान्य समाज की आदत नहीं बनाया जाता। इसका दूसरा मार्ग यह है कि इंटरनेट कनेक्शन सस्ते हो जायें तो अल्प धन वाला वर्ग भी इससे जुड़े  जिसके बच्चों को हिंदी माध्यम में शिक्षा मजबूरीवश लेनी पड़ रही है। यकीनन इसी वर्ग के हिंदी भाषा का भविष्य को समृद्ध करेगा। ऐसा नहीं कि उच्च वर्ग में हिंदी प्रेम करने वाले नहीं है-अगर ऐसा होता तो इस समय इतने लिखने वाले नहीं होते-पर उनकी संख्या कम है। ऐसा लिखने वाले निरंकार भाव से लिख रहे हैं पर उनके सामने जो समाज है वह अहंकार भाव से फैशन की राह पर चलकर अपने को श्रेष्ठ समझता है जिसमे हिंदी से मुंह   फेरना एक प्रतीक माना जाता है।
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लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, Gwalior

http://zeedipak.blogspot.com

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यह कविता/आलेख इस ब्लाग ‘दीपक भारतदीप की अभिव्यक्ति पत्रिका’ पर मूल रूप से लिखा गया है। इसके अन्य कहीं भी प्रकाशन की अनुमति नहीं है।
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टिप्पणियाँ

  • shivam  On 11/05/2010 at 22:16

    HINDI KE MAHATVA PAR KUCH INFORMATION TOH DAAL DO

  • ANJALI  On 19/07/2010 at 21:06

    In this paragraph there is no information about the importance of hindi language

  • ANJALI  On 19/07/2010 at 21:10

    very bad

  • ANJALI  On 19/07/2010 at 21:11

    did not understand anything

  • aiswaria  On 19/07/2010 at 21:13

    not good

  • ammu  On 19/07/2010 at 21:13

    good

  • akshara  On 11/09/2010 at 13:00

    I completely agree wid ‘shivam’ and ‘anjali’…no info. abt hindi’s importance. U R requested 2 highly modify it and add somethin abt the actual topic.

  • dr.rajesh bhatt  On 13/09/2010 at 17:00

    hindi din per kuch importance in our life and nation pl. give send by mail

  • Dr.G.P.Gunshekhar  On 09/01/2011 at 07:31

    Dear deepak ji,
    namaskaar.
    Sorry for using roman script and Eng.lang.Really u r a great person otherwise who is worried for thecountry as well as for the national national language. we are also using hinglish.
    thanking u,
    Urs
    Dr.Gunshekhar

  • utkarsh choubey  On 08/02/2011 at 22:09

    hindi ka patan ho raha hai isme koi shak nahi par iske zimmedar bhi to hum hi hain

  • rafia.g  On 03/03/2011 at 23:52

    हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है !
    “I am busy. I don’t have time to think all about this now.” यह आज के युग की सोच है जिसे वो बताना भी अंग्रेजी में ही चाहते हैंI अंग्रेजी का अपना महत्व है ही परन्तु क्या हिन्दी को तिरस्कार की नजर से देखना उचित है ?

    भारत के बारे में जानने वाले इंसान को इतना तो मालूम होना चाहिए कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा हैI जब राष्ट्रभाषा कहते हैं तब उसका यह अर्थ है कि यह पूरे देश में बोले जाने वाली भाषा हैI अब सवाल यह है कि क्या यह पूरे देश में बोली जा रही है या सिर्फ राष्ट्रभाषा का पद दिया गया हैI

    भारत की स्वतंत्रता के बाद १४ सितम्बर १९४९ के दिन हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित किया गयाI इसलिए हर वर्ष के १४ सितम्बर के दिन हिंदी दिवस मनाया जाता हैI भारत के संविधान में भी हिंदी और उसकी प्रगती के लिए कई प्रबंध किये गए हैंI संविधान में हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी को भी महत्त्व दिए जाने के कारण हिन्दी को उपर्युक्त पहचान और दर्जा नहीं मिल रहा हैI

    पाठशालाओं में हो या कार्यालयों में हर जगह अंग्रेजी पर ही जोर दिया जा रहा हैI भारतीय होने के नाते यह हमारा फ़र्ज़ है कि हिंदी बोलें, पढ़े, लिखें और साथ ही उसकी उन्नती के बारे में सोचें और महत्वपूर्ण कदम उठाएँI इसके साथ ही ……..

    जय हिंद I

    रफिया बेगम . जी
    (हिंदी शिक्षिका) I

  • preeti  On 11/05/2011 at 13:04

    yaks!!!!!!!!!!!!

  • aiman  On 14/05/2011 at 16:15

    no importance of language hindi

  • tanveer  On 26/05/2011 at 19:55

    hindi is important so my all punjabi grnds dont forget hindi instead of ur mother tongue like punjabiiii…….:)

  • sandeep  On 04/06/2011 at 00:05

    pls mera ek kam kar do es par (mahatvakansha hindi ka mahatva)
    par nbandh dal do

  • aruna  On 04/06/2011 at 13:51

    hindi ke mahatva sambandhi suktiyan kaise milengi?

  • HITESH  On 13/07/2011 at 20:56

    kuch to hindi ke bare me likho

  • aman randhawa  On 09/09/2011 at 18:29

    yes u r right

  • ROBIN SHARMA (NALAGARH)  On 06/01/2012 at 19:57

    HINDI BHASHA K BAREY MEIN KUCH TOU LIKH DOU(JAISE KI HINDI BHASHA K PARKAAR, BHASHA AUR SAMAAJ KA AAPSI SMBHANDH, PRARAMBHIK STAR PAR HINDI SIKSHA AUR USKEY UDDESHAYA).

  • areefa  On 15/02/2012 at 20:10

    simply superb

  • imran  On 31/07/2012 at 17:19

    hindi ke mahatv ke baare me batao yaar… hindi ko kaun use karege nahi////////????????

  • amju kurien  On 20/08/2012 at 17:53

    arey me 12th thak hindi ka kaam complete nahi kartha th! but college me hindi lene ki vajah se sincere hona pada and har ek website pe wo dum nahi he jo mujhe chahiye!! i need hindhi ka mehetva on cini feild and radio!! if anyone can help then send me to smashhackers@gmail.com

  • aaddiitt ppaatteell  On 06/09/2012 at 16:06

    excelant

  • aaddiitt ppaatteell  On 06/09/2012 at 16:07

    2 last paragraph the best

  • megha  On 06/09/2012 at 20:04

    nice achaa he but no information about hindi……………

  • manya  On 06/09/2012 at 20:05

    ulty dhaaaaaaaaaaaar

  • megha  On 06/09/2012 at 20:09

    nice but no information about hindi…………………. sorry but true is true.. ach kadhwa hota hai

  • megha  On 06/09/2012 at 20:10

    nice but no information about hindi…………………. sorry but true is true.. truth kadhwa hota hai

  • Sukesh Chopra  On 07/09/2012 at 18:42

    sorry, do not nderstnd anythng. so boaring. arre jo bola vo to daal do

  • DR.Mohan  On 12/09/2012 at 18:33

    excllent!!!!!!!!!!! just keep it up

  • sanyam garg  On 13/09/2012 at 20:39

    very good lines for hindi day

  • AJAY AGRAWAL  On 14/09/2012 at 17:07

    ​हिन्दी इस राष्ट्र की पुरातन संस्कृति का एक अटूट हिस्सा है। इतिहास साक्षी है कि इस राष्ट्र ने जब—जब किसी विपत्ति में स्वयं को घिरा हुआ पाया, हिन्दी भाषा ने चारों दिशाओं में स्थित विविध संस्कृति से युक्त राज्यों को एक सूत्र में पिरोकर राष्ट्र को संगठित किया एवं विपत्ति से राष्ट्र बाहर आ सका। चाहे अंग्रेजों के विरूद्ध 400 वर्षों तक चला स्वतंत्रता संग्राम हो, या उसके पूर्व मुगलों व यवनों के अत्याचारों से आक्रांत 1000 वर्षों का अविरल संघर्ष हो, राष्ट्रभाषा हिन्दी ने हर युग और काल में एक मंच प्रदान करने का अविस्मरणीय कार्य किया है।
    किन्तु विगत कुछ ​वर्षों में इस भाषा को पल्लवित पुष्पित करने के मार्ग में जिस तरह की बाधायें आयी हैं, या कह सकते हैं कि बाधायें उत्पन्न की गई हैं, वह एक विचित्र स्थिति है। अब तक विदेशियों ने हिन्दी को पनपने से रोका, राष्ट्रकवियों को राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत कवितायें करने से रोका, तुलसी और मीरा के भ​क्तिपदों तक पर तरह—तरह के अंकुश लगाये गये, वह इस बात का द्योतक था कि भारतीय संस्कृति की प्राचीन उन्नत परम्परा को नष्ट करने के उद्देश्य से विदेशियों ने किया क्योंकि यही एक मार्ग था जिसके द्वारा वे इस राष्ट्र की एकता व अखण्डता को खंडित कर सकते थे। किन्तु यही कार्य जब स्वयं भारतीय करें, और वह भी स्वातंत्रयेत्तर भारत में, तो इसका कारण कुछ अस्पष्ट सा प्रतीत होता है। अंग्रेजी भाषा सार्वभौमिक रूप से सर्वमान्य एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है एवं उसका अपना एक कार्यक्षेत्र है, क्षेत्रीय भाषाओं की भी अपनी एक महत्ता है। किन्तु एक राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी के अतिरिक्त हमारे पास और क्या विकल्प है? भारत के हर कोने में बोली और समझी जाने वाली यह एक व्यापक साहित्य से युक्त मीठी और सहज भाषा है, यह अलग बात है कि अपने स्वार्थ की अंधी परिभाषाओं में स्वयं को बद्ध कर कुछ लोग अलगाववादी मानसिकता के कारण हिन्दी का विरोध आदिकाल से करते आये हैं, किन्तु ऐसा करने वाले स्वयं जानते हैं कि यदि हिन्दी का विरोध है तो उनके प्रदेश से दूसरे प्रदेश में जाकर काम करने वाले लोगों का जीवन यापन असंभव हो जायेगा। अर्थात् भाषा की व्यापकता का लाभ तो वे लेना चाहते हैं किन्तु इसका प्रतिफल देने के बजाय वे हिन्दी के विरोध में ही स्वर मुखर करते हैं।
    यह प्रश्न मात्र हिन्दी दिवस तक ही सीमित नहीं है बल्कि एक शाश्वत् सोच का विषय है कि हमें अपनी ही मातृभाषा से ऐसा दोयम दर्जे के व्यवहार की क्या आवश्यकता है? विश्व की हर भाषा का ज्ञान हो, इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है, किन्तु अपनी ही मातृभाषा की सतत उपेक्षा कर हम संस्कृति को किस ओर ले जा रहे हैं, यह मंथन का विषय है। अंग्रेजी समेत किसी भी भाषा में हमारी निष्ठा हो किन्तु वह हिन्दी के प्रति उपेक्षा की कीमत पर कतई स्वीकार्य नहीं है। यह समय है जब हमें समझना होगा कि हमारा राष्ट्रध्वज मात्र कपड़े का टुकड़ा नहीं, वरन् सम्पूर्ण राष्ट्र की आत्मा का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रगीत मात्र कुछ शब्दों का समंजन नहीं, अपितु प्रत्येक भारतवासी के हृदय की गूंज है। इसकी महत्ता हमारे स्वयं के अस्तित्व से कदापि कम नहीं। अंग्रेजों ने इस महत्ता को समझा था इसीलिये सबसे पहले उन्होंने अपने पैर जमाने के लिये भारतीय संस्कृति, स्थानीय बोलियों और राष्ट्रभाषा पर चोट की और लोगों को अलगाववादी मानसिकता की धारा में बहाने का प्रयास किया। किन्तु अब स्थितियां विपरीत हो चुकी हैं। अब अपने ही राष्ट्र के मूर्धन्य उत्तरदायी लोग हिन्दी की अस्मिता को सुर​क्षित रखने के प्रति उदासीन हैं। यह एक गंभीर स्थिति है एवं इस उदासीनता के परिणाम भी प्रतिदिन राष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से आते रहे हैं। अपनी मूल संस्कृति का सर्वनाश करके किसी भी विकास की कल्पना करना मृगमरीचिका के समान है। अत: यह प्रयास मात्र हिन्दी दिवस तक न होकर हर पल अनवरत चले, तभी हिन्दी दिवस की सार्थकता है। हिन्दी दिवस हिन्दी के लिये कुछ करने हेतु प्रारम्भ करने का दिन नहीं है, वरन् वर्ष भर हिन्दी के उन्नयन के लिये किये गये प्रयासों की समीक्षा का दिन है। आईये, हम भी अपने वर्ष के प्रयासों की समीक्षा करें एवं यदि हमारा प्रयास शून्य रहा है, तो आज ही आत्मविश्लेषण करें कि अपनी संस्कृति व भाषा के महत्व को न समझकर हमने क्या खोया है? आप सबको हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

  • rahul  On 21/09/2012 at 17:28

    i am agreeing with anjali
    but agarwals essay is better

  • aditi mishra  On 24/09/2012 at 18:07

    really impressive 7 thanks also as ye meri speech mei mere bht kam aaya h

  • shambhavi gupta  On 27/09/2012 at 20:10

    Ise likhne ke liye dhanyvad.kai dino se hindi ke prati logo me failti gruna ko dekh mai ne apne vidyalay is vishay par bhashn dene ka nishchay kiya tha. Aap ke duvara likhi gai baato ko mai us me jarur jodungi aurek bar fir apka hardik dhanyvad…

  • sandeep gupta  On 19/10/2012 at 21:19

    hindi essay achha hai aur best hindi hamara rashtriya bhasha hai

  • nidhi jain  On 14/01/2013 at 18:04

    aaj kal ke log kahte hai ki hindi subject bahut tough hai ye mujhse nhi padha jata isiliye kuch log english subject ko choose karte hai.but i like hindi language becouse hindi word se mera nam bhi ban jata hai see…hindi-nidhi

  • ravi  On 25/01/2013 at 18:10

    yas ae sahi bat he ki log english language choose karte he kayoki english laguage nahi padhenge to a6i job nahi milage agar aesh hi chalata rahega tonamari payari lanuage ka namo nishan mit jayega so plllllllzzzzzzzzzzzz save hindi language ravi i love hindi language

  • vivek  On 16/06/2013 at 14:10

    I don’t understand any thing good bye but very good . $$

  • Balu Gayakwad  On 04/09/2013 at 00:24

    Hindi Din ki shubh kamanaye

  • raj  On 07/09/2013 at 11:19

    Nicest

  • a.sri sai chandan  On 11/09/2013 at 16:05

    excellent.its beautiful

  • Ankur  On 12/09/2013 at 15:44

    Plz….. “Rastriya ekta mein hindi ka mahatwa” iss topic ke bare me bistar se bataye na….plz…

  • Aishwarya Kadam  On 13/09/2013 at 20:26

    good but you are moving away from the topic & the topic is ‘Hindi vishay ka mahatva’.

  • Nagendra singh  On 15/09/2013 at 15:30

    Kya koi mere liye siksha ka madhyam hindi ke vipaksh me speach likh dega?plzzzz…

  • lakshnaa  On 26/09/2013 at 21:06

    very poor information !!!!!!!!!!!!!!!

  • lakshnaa  On 26/09/2013 at 21:09

    can i have an essay writing on only the importance of hindi in mauritius please !!
    !!!!!!!!!!

  • Varsha Oraon (@Varsha_Oraon)  On 11/11/2013 at 01:27

    this is ok….but can you please mention the main reasons for it…????

  • Mansi  On 14/07/2014 at 09:46

    Its good
    keep it up

  • CHETAN BHARAMBE  On 10/09/2014 at 13:01

    AADARNIY DEEPAK JI NAMASKAR,
    INTER NATIONAL LEVAL PAR HINDI BHASHA KA MAHATVA SAMJHANE KE LIYE YA US PAR KAM KIYE HO EASE MAHAN VYAKTIYO KE BARE ME BATAIYE

    CHETAN BHARAMBE
    HINDI TEACHER

  • JYOTIT  On 11/09/2014 at 19:21

    Hindi jansampark ki bhasha hai.ye vo bhasha hai jiski vajah se desh ke kisi bhi kone me hamara astitva surakshit rah sakta hai.Itni shakti kisi aur bhasha me ni.Angrezi aaj ki zarurat hai per majburi ni.Agar prayas kiya jai to vah din duur ni jab hindi vishwa me apna percham lahrayegi.JYOTI

  • maaninder.kaur  On 12/09/2014 at 20:58

    goood…….. but write about importance of hindi languahe.:)

  • Prabodha Kumar Parhi  On 25/09/2014 at 22:02

    It was gooooood……….but plz wright importance of Hindi:)

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