इश्तिहार और दर्शक-त्रिपदम (hindi tripadam)


इश्तिहार
प्यारे मजमून
धोखे से भरे।

अनजाने में
सामने आ जाये तो
दिल में भरे।

कामयाबी के
ढेर सारे सपने
सोने से भरे।

झूठे हों तो भी
देखने की कीमत
दर्शक भरे।

तस्वीर में
चमकते चेहरे
रंग से भरे।

अलसुबह
देख वह चेहरे
आईना डरे।

मेला या खेल
नट और खिलाड़ी
पैसे से भरे।

पैसे के लिये
इश्तिहारी खेल
सच से परे।

खामोश देखो
जब सिक्के न हों
जेब में भरे।

इश्तिहार
पढ़कर करना
याद से परे।

……………………..

यह हिंदी शायरी मूल रूप से इस ब्लाग
‘दीपक भारतदीप की शब्दज्ञान-पत्रिका’

पर लिखी गयी है। इसके अन्य कहीं प्रकाशन के लिये अनुमति नहीं है।
अन्य ब्लाग
1.दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका
2.दीपक भारतदीप का चिंतन
3.अनंत शब्दयोग
कवि और संपादक-दीपक भारतदीप

Post a Comment

Your email is never published nor shared. Required fields are marked *

*
*