इश्तिहार
प्यारे मजमून
धोखे से भरे।
अनजाने में
सामने आ जाये तो
दिल में भरे।
कामयाबी के
ढेर सारे सपने
सोने से भरे।
झूठे हों तो भी
देखने की कीमत
दर्शक भरे।
तस्वीर में
चमकते चेहरे
रंग से भरे।
अलसुबह
देख वह चेहरे
आईना डरे।
मेला या खेल
नट और खिलाड़ी
पैसे से भरे।
पैसे के लिये
इश्तिहारी खेल
सच से परे।
खामोश देखो
जब सिक्के न हों
जेब में भरे।
इश्तिहार
पढ़कर करना
याद से परे।
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