मित्र ने घर में घुसते ही
हाथ में मोबाइल फोन थमाते हुए कहा-
‘दीपक बापू , इसका नाम हिंदी में बताओ
भले ही मैं पढ़ता लिखता नहीं पर
मातृभाषा के प्रति लगाव है
इसके अंग्रेजी शब्द मोबाइल से अलगाव है
यह नाम लेते ही होती है आत्मग्लानि
जैसे हो रही हो आत्मसम्मान की हानि
इस संकट से निकलने का मार्ग बताओ
अनुवाद की शर्त पर खरा उतरे
ऐसा मातृभाषा का शब्द बताओ’
हाथ से उठाकर पलंग पर मोबाइल को फैंका
फिर मित्र को घूरकर देखा
अपनी टोपी उतारी और गंजे सिर पर
हाथ फिराते हुए गुस्से में करने लगे कविताई
और कहैं महाकवि दीपक बापू-
‘फ्लाप लेखक हूं इसलिये हमारा मजाक उड़ाते हो
शब्दों का कोई शोरूम बनाने की नहीं शक्ति मेरी
यही अनुभव करवाते हो
फिर भी दोस्ती का कर्तव्य निभाते हुए
समझाता हूं
हर शब्द का शाब्दिक अनुवाद नहीं होता
काम से भी इसका कहीं कही नाम होता
इस भारत में कुल दो सौ से अधिक
बड़े लोग नहीं होंगे जिनके पास
अपने काम से फुर्सत नहीं है
बाकी दिखायें कितना भी स्वयं को व्यस्त
इसकी जरूरत नहीं है
जब से हमने किया है अपने मोबाइल का स्विच आफ
सारे दुष्ट ग्रह हो गये हैं साफ
तुम पहले करते थे शहर के दूसरे
सिरे पर बैठकर हैरान
अब संकट बढ़ाने के लिये
हमारे पास आते हुए
तुम भी होते हो परेशान
लिखते थे तब अपनी पत्रिका पर कोई पाठ
तुम्हारी घंटी देती हमारा ध्यान काट
अब जब तक आये नहीं
तब कर लेते हम अपना काम कहीं
लोगों ने तो इसे समझ लिया खिलौना
पकड़े रहते हैं इसका हर समय हर कोना
अपने लोगों की परेशानियों की खबर जल्दी मिले
ताकि जल्दी हमदर्दी दिखाने पहुंच जायें
और अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बढायें
इसलिये इसे अपने दिल के पास
लगाये फिर रहे हैं
अपने ही पैदा किये तनाव में घिर रहे हैं
इश्कबाजी और फालतू बातें करते देखकर
यह नहीं लगता कि यह कोई काम का है
करते हैं सभी बकबक, वार्तालाप तो नाम का है
इसलिये तुम्हें या जमाने को नहीं जमे
हमने मोबाइल फोन का नाम बकबक रख दिया
इसका न हो भले कोई तार्किक आधार
पर मोबाइल हो गया है बकबक का बाजार
हमारी बात समझ में न आये तो
देश में तो इसका हल संभव नहीं है
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा करवाओ
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नोट-यह हास्य व्यंग्य रचना काल्पनिक है और किसी व्यक्ति या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है। अगर किसी की कारिस्तानी से इसका मेल हो जाये तो वही उसके लिये जिम्मेदार होगा। इसे एक मित्र द्वारा मजाक में यह प्रश्न उठाये जाने पर कवि/लेखक ने इस पर लिखा है।
दीपक भारतदीप
9 Comments
नमस्कार।
सुंदरतम रचना। काल्पनिक है पर सच्चाई है, यथार्थ है।
अच्छा व्यंग है
mobial banaam bakabak yantr ho gaya hai .
बहुत बढ़िया -अच्छा चित्रण -वास्तविकता -वाकई यह एक खिलौना ही हो गया है -सचमुच यह परेशानी पैदा करने वाली चीज़ हो गया है -टिपण्णी समझ में नही आई की अगर किसी की कारिस्तानी से इसका मेल हो जाए तो वही इसका जिम्मेदार होगा
bahut badhiya
Maja aa gaya
well done my friend!
mobile ek bachho ka khilona ho gya hi . jise her ek admi leker ghumta hi……….
sahi kaha dost