मुनीम के ब्लाग कौन पढ़ता-हास्य कविता

(यह इस ब्लाग की 300 वीं पोस्ट है)

आया फंदेबाज और बोला
‘दीपक बापू, 
तुम्हें देखकर फ्लाप मेरा  कलेजा फटता
सोचता हूं  तो पढ़ना पसंद नहीं करता
पर तुम्हें अन्य कोई क्यों नहीं पढ़ता
हमारे भतीजे ने मांगा है
फिल्मी अभिनेताओं के ब्लाग का पता
किसी तरह पता कर हमें बता दो
वह कुछ पढ़ना और सीखना चाहता है
बहुत कहते हैं पर तुम्हारा लिख नहीं पढ़ता

सुनकर पहले टोपी उतारी
और फिर सिर पर हाथ घुमाया
और टोपी को सिर पर चढ़ाते हुए
कहें दीपक बापू
‘हमारे फ्लाप होने पर
तुम क्यों शर्माते हो
फिर अभिनेताओं  के ब्लाग का पता  पूछकर
हमारे दिमाग को गरमाते हो
इतने दिन हो गये हमारे पास बैठते
यह  भी नहीं जान पाये कि
अभिनेता के नाम या प्यारे नाम से ढूंढो
सब सामने आ जायेगा
सच भी यही है
सब सीख रहे हैं अभिनेता और अभिनेत्रियों से
तुम्हारा भतीजा भी सीख ले तो
उससे हम पर क्या दुष्प्रभाव पड़ता
जो जमीन पर चमक रहे हैं
अभिनेता, अभिनेत्री, संपादक और धनपति
सितारे बनकर
अंतर्जाल पर भी छायेंगे
हमें चलाता है ब्लाग
वह ब्लाग को चलायेंगे
फिर भी सदैव जो शब्द बने रहें चमकदार
हमारे ब्लाग पर आयेंगे
हम मिट जायें पर वह चमक नहीं गंवायेंगे
इसलिये हम भी लिख रहे है
यह तो हम भी जानते हैं कि
बड़े नाम वालों को ढूंढते हैं सभी
हम जैसे मुनीम का ब्लाग कौन पढ़ता
लिखते हैं इसलिये हम
शब्दों की पालिश से
दूर हो जाये मस्तिष्क से
दो और दो चार से उपजी जड़ता
………………………….

Post a Comment

Your email is never published nor shared. Required fields are marked *

*
*