कुछ दृश्य इस तरह सामने आते हैं
कि शब्द हो जाते खामोश
निगाहों से वह पढ़े जाते हैं
लिखकर कोई क्या बतायेगा
तस्वीरों में चेहरे
सारा माजरा बयां कर जाते हैं
जो देखकर भी न समझे
वह पढ़कर भी क्या समझेंगे
हृदय में बसता हो जीवन
संवेदनाओं की बहती हो जब पवन
चक्षुओं से देखकर ही
स्पर्श अनुभव किये जाते हैं
जागते हुए भी सोते हैं कई लोग
उनको समझाने से मतलब बेमानी हो जाते हैं
……………………..
दीपक भारतदीप