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उनका नाम ही दरियादिल हो जाता-कविता
बांट लिया करो दोस्तों से
उनका नाम ही दरियादिल हो जाता है
This entry was written by दीपक भारतदीप, posted on 09/05/2008 at 4:16 pm, filed under Blogroll, E-patrika, Media, Media Biz, bharat, blogger, blogging, bloging, film, friends, hasya kavita, hindi gyan, hindi kahani, hindi kavia, hindi megzine, hindi poem, hindi sahitya, kavita, mastram, shabda, shayri, vididha, vyangya, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web nav bharat, web panjab kesri, web patrika, web times, कला, कविता, क्षणिका, चरित्र, दर्द बांटते चलो, दीपक भारतदीप., मस्तराम, विश्वास, व्यंग्य, शब्द, शायरी, शेर-ओ-शायरी, समाज, साहित्य, हास्य-व्यंग्य, हिंदी आलेख, हिंदी साहित्य, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी. Bookmark the permalink. Follow any comments here with the RSS feed for this post.
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One Comment
बहुत बढ़िया. लिखते रहिये.