उनका नाम ही दरियादिल हो जाता-कविता

अपने दिल का बयां कभी कभी

दूसरे के अल्फाजों में नजर आता है

वह दिल को छू जाता है

इसलिए कहते हैं

दर्द और खुशी दोनो ही

बांट लिया करो दोस्तों से
 
जश्न का मौका हो तो

मजा हो जाता दुगुना

गम आधा रह जाता है

खोये रहोगे अपने ही दिल में

तो रोशनी कहीं से नहीं आयेगी

जो सुनोगे किसी और की आवाज

तभी कोई मिलेगा आसरा

वरना कहते हैं कि

अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ पाता है

अपने लिये तो जिंदा हैं सब

बांटकर खाते हैं जो लोगों से मिलकर

उनका नाम ही दरियादिल हो जाता है
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One Response to “उनका नाम ही दरियादिल हो जाता-कविता”

  1. बहुत बढ़िया. लिखते रहिये.

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