उनका नाम ही दरियादिल हो जाता-कविता
Posted on May 9, 2008 by दीपक भारतदीप
अपने दिल का बयां कभी कभी
दूसरे के अल्फाजों में नजर आता है
वह दिल को छू जाता है
इसलिए कहते हैं
दर्द और खुशी दोनो ही
बांट लिया करो दोस्तों से
जश्न का मौका हो तो
मजा हो जाता दुगुना
गम आधा रह जाता है
खोये रहोगे अपने ही दिल में
तो रोशनी कहीं से नहीं आयेगी
जो सुनोगे किसी और की आवाज
तभी कोई मिलेगा आसरा
वरना कहते हैं कि
अकेला चना कभी भाड़ नहीं फोड़ पाता है
अपने लिये तो जिंदा हैं सब
बांटकर खाते हैं जो लोगों से मिलकर
उनका नाम ही दरियादिल हो जाता है
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बहुत बढ़िया. लिखते रहिये.