12 दिसंबर 2007 को इस हजार की संख्या पार कर चुके इस ब्लाग ने कल बीस हजार की पाठक संख्या को पार कर लिया। इस संख्या को पार करने वाला यह मेरा दूसरा ब्लाग है।
इस ब्लाग के साथ मेरी दिलचस्प याद जुड़ी हुई है। ब्लागस्पाट पर टाईप करते हुए यूनिकोड में अपनी पहली पोस्ट छोटी कविता के रूप में इसी पर रखी-क्योंकि मुझे उसमें बड़ी पोस्ट लिखने में दिक्कत आ रही थी-और सबसे पहला कमेंट भी इस पर आया। उससे पहले मैंने सभी तीनों ब्लाग पर कृतिदेव की पोस्ट रखी थी और मैं मानकर चल रहा था कि अब उसी से आगे जाना है। जब कुछ ब्लाग लेखक उन ब्लाग पर मुझसे यूनिकोड में लिखने को कह रहे थे तो भी मैं उसकी परवाह नहीं कर रहा था। ऐसे में कोई महिला ब्लाग लेखिका (जिससे बाद में फिर संपर्क नहीं हो सका) ने मुझे इस बारे में ईमेल भेजकर रोमन हिंदी में लिख रही थी कि मेरे ब्लाग पढ़ने मेंे नही आ रहे तब मैंने उसे इस ब्लाग का पता दिया। उसने लिखा-‘वहां तो सब पढ़ने में आ रहा है। वाह,वाह बढ़िया । मगर उसने कोई कमेंट इस पर नहीं लिखी। हां, मैने तब यूनिकोड में लिखने का निर्णय लिया।
नारद पर उसी समय इसे पंजीकृत नहीं कराया पर ब्लागवाणी के अभ्युदय के साथ ही दोनों जगह इसे पहुंचाया और हिंदी ब्लाग पर तो यह पहले से ही था। यह मेरा ऐसा ब्लाग रहा है जो बिना फोरम पर दिखे भी वर्डप्रेस के डेशबोर्ड पर नंबर एक पर आया था। फोरमों पर दिखने से पहले ही यह ब्लाग अपने लिये तीन हजार पाठक जुटा चुका था। तब अनुभव की कमी के कारण मुझे समझ में कुछ नहीं आता था पर बाद में यह बात समझ में आयी कि ब्लाग का मार्ग फोरमों से आगे भी जाता है। ब्लाग की डालरों में बताने वाली वेब साईट के मुताबिक यह मेरा सबसे महंगा ब्लाग है। हालांकि फिर भी यह अन्य ब्लाग लेखकों के ब्लाग के मुकाबले बहुत सस्ता है पर फिर भी मैं इससे संतुष्ट हूं। मुझे इस ब्लाग से एक ही संदेश मिलता है‘डटे रहो, तुम जिस रास्ते पर चल रहे हो उससे विचलित नहीं हो’। जिस तरह से पिछले पंद्रह दिन से यह ब्लाग व्यूज ले रहा था उससे मुझे लग रहा था कि आज शाम तक यह जादूई आंकड़ा पार करेगा पर कल इसने अपने पुराने तेवर दिखाये जब मैं इस पर पोस्ट डालने लगा तो उसी समय यह इस आंकड़े को पार करने की तैयारी में लग रहा था और आज तो यह उससे भी आगे जा रहा है।
नीचे इस ब्लाग की प्रथम बीस पोस्ट जिन्हें अधिक पाठकों ने देखा और विभिन्न फोरमों से मिलने वाले व्यूज की संख्या। यह स्पष्ट संदेश कि अध्यात्म और व्यंग्य पर ही मुझे लिखते रहना चाहिए। अपने ब्लाग लेखक मित्रों, पाठकों और समय समय पर तकनीकी विषय पर सहायता देने वाले मित्रों का मैं हृदय से आभारी रहूंगा। दूसरों को बहुत लघु लगने वाली यह उपलब्धि मेरे लिये बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रथम बीस पोस्ट
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रहीम के दोहे:सुख में अंहकार दु:ख में कुं 244
चाणक्य नीति:विद्या की शोभा उसकी सिद्धि 205
मेरा परिचय=दीपक भारतदीप, ग्वालियर 202
चाणक्य नीति:परोपकार मधुमक्खी से सीखें 175
पहले आतंकवाद आया कि पर्यावरण प्रदूषण 175
रहीम के दोहे:जहाँ उम्मीद हो वहीं जाएं 146
रहीम के दोहे:मछली का जल प्रेम प्रशंसनीय 142
चाणक्य नीति: कुत्ते और कौवे से गुण ग्रहण 126
चतुराई से मुट्ठी में कर लो-हास्य कविता 123
चलना ज़रा संभल कर-हास्य कविता 119
आज नवमी-भक्तों के रक्षक हैं भगवान् श्रीर 117
रहीम के दोहे:परिश्रम कर भोजन ग्रहण करें 115
चाणक्य नीति:पांच वस्तुओं का संग्रह अवश्य 115
चाणक्य नीति:बेमौसम राग अलापना हास्यास्पद 115
दादा-पोते की राजनीति और मनोरंजन 112
मन के बहरों के आगे क्या बीन बजाना 111
चाणक्य नीति:क्रोध उतना ही करें जितना निभ 104
दिल हुआ इधर से उधर 103
असल पर नक़ल का राज 101
चाणक्य नीति:प्रेम और व्यवहार बराबरी वाले १००
चाणक्य नीति:मनुष्य को हर विधा में पारंगत 100
Referrer Views (पाठकों के आने के मार्ग)
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2 Comments
bahut badhai
लगे रहें , बन्धु ।