मालिक नहीं तो मजदूर का रोल करेगा-हास्य कविता

फंदेबाज आया और बोला
‘दीपक बापू, मेरा छोटा भाई
बहुत परेशान
चार वर्ष का उसका लड़का है शैतान
उसे वह बड़ा आदमी बनाना चाहता है
उसकी पत्नी अपने बेटे को
अभिनेता या संगीतकार बनाने की करती विचार
भाई उसे क्रिकेट खिलाड़ी बनाना चाहता है
अब कहां से करें शुरू
कौन सा ढूंढें पूछने के लिये कोई गुरू
तुम ही कोई सलाह दो
उन तक पहुंचा देंगे
बता देंगे हमारे दोस्त हैं कितने मेहरबान’

सुनकर उखड़े दीपक बापू और फिर कहें
‘मालुम होता है पूरा घर
टीवी से आगे नहंी सोच पाता
इसलिये तुम्हारे माध्यम से
रोज एक सवाल हमारे पास भिजवाता
अगर हम कुछ बनना-बनाना जानते तो
भला क्या अपना घर कम था
जहां हमारे लिये हर कदम पर गम था
फिर भी अपनी अक्ल से चल रहे
अपनी मेहनत से पल रहे
वैसे तुम कार्यक्रम खूब देखते
पर अक्ल की बात होती तो पत्थर फैंकते
अब गया जमाना किसी एक हुनर में
माहिर होने का
हो न हो अपने अंदर कोई प्रतिभा
पर किसी पर भी यह जाहिर न होने का
तुम अपने भतीजे को
संगीतकार या गायक कलाकर ही बनाओ
चूंकि कोई तुम्हारे घर में फिल्मी हीरो नहीं
इसलिये वह तो भूल जाओ
फिर भी कुछ अपनी कुछ उसकी किस्मत आजमाओ
हो सकता है कहीं
कोई आईडियल वगैरह बन जाये
फिर लोगों के मन में छा जाये
अगर छा गया तो फिर
क्रिकेट तो उसकी जेब में होगी
बल्लेबाजों के बैट उसके इशारे पर नाचेंगे
तो गेंदबाज की गेंद उसके इशारे की मोहताज होगी
फिर भी थोड़ी बहुत क्रिकेट
खेलने को वक्त देते रहना होगा
नहीं तो फिर हर खिलाड़ी की
अकड़ को सहना होगा
नहीं मिला फिल्म में मौका तो
क्रिकेट खिलाड़ी भी ठीक होगा
वह भी नही बन पाया तो
कुछ नाच गाना जानते हुए
मैच के इंटरवैल में भी
कार्यक्रम पेश कर मिनी हीरो होगा
तुम्हारी चाहत अगर
उसको कैमरे में देखने की है
तो बस धकियाते जाओ
मालिक नहीं तो मजदूर का रोल करेगा
कभी न कभी तो वक्त होगा मेरहबान
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One Comment

  1. Posted 28/04/2008 at 3:19 pm | Permalink

    आनंद आ गया :)

    *** राजीव रंजन प्रसाद


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