दोस्त को कई रूपों में आने का हक होता-हास्य कविता
भतीजे को साथ लेकर आया फंदेबाज
और बोला-‘‘दीपक बापू इस आवारा को भी
कुछ अंतर्जाल का काम सिखा दो
तीस का हो रहा
फिर भी अक्ल से सो रहा
सब कर रहे अंतर्जाल पर मजे
इसे भी ब्लाग बनाना सिखाओ
तो इसकी भी बारात सजे
कर गये इसके दोस्त
अंतर्जाल पर चैट करते हुए अपनी शादी
यह नहीं इंटरनेट का आदी
वेब साइट या ब्लाग सजवाओ
कहीं चैट का इंतजाम करवाओ
इसका नाम भी अंतर्जाल पर लिखा दो
तुम हमारे दोस्त हो समाज को दिखा दो
नाक पर टंगे चश्में से
घूरते हुए बोले दीपक बापू
‘‘काहे, बाप ने इसे
घर से बाहर निकाल दिया
जो यहां साथ लाये हो
अंतर्जाल पर क्या दुल्हनें बैठीं है
जो इसे ब्याहने ले आए हो
हम तो नहीं जानते
पूछ कर बता देंगें
कोई होगा लव या मैरिज गुरू हुआ तो
इसकी भेंट करवा देंगे
मगर यह मायाजाल है ऐसा
कि सर्वशक्तिमान की माया भी
इसे नहीं समझ सकती
नाम बहुत होते है
पर पहचान बहुत मुश्किल लगती
पचास साल की महिलाएं भी
अठारह साल की बनकर
टाइमपास करतीं
ब्लागरों ने लिखे ऐसे किस्से ढेर हैं
असली कम छद्म नाम के बहुत शेर हैं
अभी ही इसकी उमर निकल गयी लगती
फंसा रहा इस जंजाल में तो
कई हूरों के फोटो दिखेंगे
पर पता तब चलेगा जब
मिलने के लिये ईमेल लिखेंगे
खालीपीली चैट तो
चल जायेगी बरसों तक
पर मामला जमेगा असल में
इसमें हमें तो शक होता है
एक दोस्त को कई दोस्तों के
रूप में आने का हक होता है
इसलिये बड़े होने के नाते
सब परिवार वाले कुछ
अपनी जिम्मेदारी उठाओ
अंतर्जाल है बहुत बड़ा मायाजाल
उसमें इस मत उलझाओ
अपनी जिम्मेदारियां मत टालो
कभी भी अंतर्जाल पर
हम जानते हैं तुम्हारी चालाकी
इसलिये कहते हैं कि
अपने दहेज के रेट कम कर
इसका विवाह कराओ
और समाज को भी दिखा दो
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रहीम का गंगा का समुद्र में मिल जाने वाले दोहे पर आपकी व्याख्या पढी -सराहना के दो शब्द लिखना चाहता था मगर उसने पास वर्ड पूछ पूछ कर परेशान कर दिया आख़िर यहाँ आकर लिखना पढ़ रहा है हाँ एक बात और मेरे ई मेल में कोम नहीं है ==को इन है
बहुत गहन चिंतन कर अर्थ किया गया है वरना तो एक लाइन में समझा दिया जाता है की पराए घर जाने से इज्जत के हो जाती है जैसे गंगा की समुद्र से मिलने पर =लेकिन ये दोहा इतना व्यापक अर्थ रखता होगा ये सोचा भी न था परगने से बाहर जिले से बाहर प्रदेश से बाहर और देश से बाहर रोजगार के लिए जाने वालों को भी यह इतनी शिक्षा देगा -अर्थ और व्याख्या सराहनीय है