जब पीडा हो मन में तो शोर मचा दो-हिन्दी शायरी

अपनी पीड़ाओं का बयान
वह कुछ यूं करते हैं कि
किसी को शिकायत न लगे
दूसरा करे तो उनको शोर
नजर आता है
उस पर उनका शांति प्रेम जगे
यह तो आदमी के मन का खेल है
अगर पीडा हो मन में तो शोर मचा दो
दुनिया से मिला दर्द यहीं बिछा दो
कहने वालों की क्या सुनना
बदल जाते है रिश्तों के समीकरण
कभी अपना ही पराया तो
पराया अपना लगे
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2 Responses to “जब पीडा हो मन में तो शोर मचा दो-हिन्दी शायरी”

  1. [...] ७.जब पीडा हो मन में तो शोर मचा दो-हिन्दी श…: मतलब चोर मचाये शोर के अनुसार अब शायरी चोरों का काम हो गयी। [...]

  2. Janab Shukla Saheb phursatia ke madhyam se yahan tak aaya aur aaj bahut afsos hua ki ham hindi main bilkul type nahin kar pate. Hamto aap ko kabhi kabhi yaad karte hain. Magar shukr hai ki sab padh kar aanand to ley sakte hain.
    Mazhar Masood

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