अंतर्जाल पर पहले चोरी होने जैसा लिखो तो-(हास्य-व्यंग्य)

अंतरजाल पर ब्लोग लिखने वाले कुछ लोगों को शिकायत है कि उनके ब्लोग चोरी हो जाते हैं। अभी तक मैंने कई ब्लोग ऐसे देखे हैं और वह बराबर दिखते हैं फिर चोरी कैसे हुआ? उनके बताये पते पर पहुँचता हूँ तो पता लगता है कि उनकी सामग्री चोरी हुई है न कि पूरा ब्लोग।

अब कुछ ब्लोगर सहानुभूति में कमेन्ट लिखते हैं तो कुछ मजाक उठाते हुई ठंडी आहें भरकर कमेन्ट लिखते हैं कि ‘वह कौनसा दिन आयेगा कि हमारा चिट्ठा चोरी होगा और हम इस तरह लिखकर हिट बटोरेंगे।”

जो सहानुभूति जताते हैं उनका प्रयास सराहनीय है पर जिनको इसमें फिक्सिंग नजर आ रही है उनको बता दूं कि जिन चिट्ठों की सामग्री चोरी हुई है उनमे आला दर्जे की पोस्टें हैं और खासतौर से गजल और गीत और कवितायेँ अधिक हैं। जिन लोगों को अपनी सामग्री चोरी कराना हो वह पहले कवितायेँ, गजल, और गीत लिखे और चाहें तो कहीं से उडा लायें और जिसकी उडाएं उसे बारे में यह सुनिश्चित कर लें कि वह कभी अंतर्जाल का दौरा नहीं करेगा। उनकी यह कवितायेँ भी कोई दार्शनिक या हास्य से संबंधित नहीं होना चाहिए बल्कि प्यार, मोहब्बत और गम से सराबोर होना चाहिए तभी कोई यकीन करेगा कि आपकी पोस्ट चोरी हुई है। अब मैं तो नहीं कह सकता कि लोग अपने मित्रों को पटाकर ऐसे काम करवाते हैं पर कुछ ब्लोगर ऐसी बातें लिख जाते हैं और यह देख कर दुख होता है कि इतनी मेहनत से लिखी रचनाओं की चोरी होने पर ऐसे शक प्रकट करते हैं। पर भला उनको कौन रोक सकता है, हम भी यह सोचकर चुप हो जाते हैं कि चलो कोई अभद्र शब्द तो नहीं लिखा।

हाँ पर जो लोग आतुर हो रहे हैं और चोरी नहीं हो रही तो उनको यह सोचना नहीं चहिये कि कोई वह खराब लिखते हैं, पर अगर वह कुछ लोगों की सलाह मानकर अपनी रचनाओं की चोरी करवाना चाहते हैं तो उनको फिर लिखना वैसा ही पडेगा। अब एक ब्लोगर की सलाह है कि यह काम अपना छद्म नाम से ब्लोग बनाकर भी किया जा सकता है। इस बारे में मेरी सलाह यह है कि भले ही इस तरह के प्रचार का मार्ग अपनाएँ पर अगर आपकी पोस्ट बहुत अधिक असाधारण नहीं हुई या उसमें प्यार, मोहब्बत और गम के साथ जिन्दगी के अफ्सानों को बयान करने वाली कविता, गजल, गीत या शायरी नहीं हुई तो संदेह की दायरे में आ जायेंगे।

आज हमने सोचा कि यार कैसे हिट हों। फिर सोचा पहले देखें तो कि अपनी रचनाएं कैसीं हैं तो पाया कि वह ऐसीं भी नहीं है कि हम उनको उठाकर थोडा सुधार की साथ प्रस्तुत करें फिर और कोई क्या चुराएगा? जो लोग इसके लिए अंतर्जाल पर फिर रहे हैं कि कहीं हमारे चिट्ठे की सामग्री चोरी की मिल जाये और हम उसका प्रचार करें तो उनको पहले अपनी पोस्टों का भी अवलोकन करना चाहिए। ऐसे नहीं चोरी होने वाली। पहले कविता और गजल लिखने का अभ्यास करो उसमें जब मेहनत पड़ेगी और उसकी चोरी होगी तब पता लगेगा कि कितनी तकलीफ होती है। अलबता अपने ब्लोग की सामग्री चोरी करवाने के लिए ऐसी सामग्री भी होना चाहिए। मैंने अपने एक मित्र के ब्लोग पर जब अपने ब्लोग चोरी न होने कि शिकायत वाली पोस्ट लिखी तो उनको सलाह दी कि वह प्यार, मोहब्बत और गम वाली कविता या गजल लिखें . समझदारी वाली रचनाएं लिखकर चोरी की उम्मीद करना गलत होगा।

2 Responses to “अंतर्जाल पर पहले चोरी होने जैसा लिखो तो-(हास्य-व्यंग्य)”

  1. बातोंबातों में बहुत कुछकह दिया।अच्छा लेख है।

  2. हमें तो कविता लिखना नहीं आता तो क्या हम कभी इस लायक नहीं बन पायेंगे कि हमारा भी चिट्ठा चोरी हो..?

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