चाणक्य नीति:भगवान् की कृपा हो तो तीनों लोक घर समान

१।किसी भी कार्य करने से पहले यह देखना चाहिए की उसका प्रतिफल क्या मिलेगा? यदि प्राप्त लाभ से अधिक परिश्रम करना पड़े तो वह करना ही बेकार है। माला गूंथने, चन्दन घिसने से या ईश्वर का स्तुति का स्वयं गान करने से किसी मनुष्य का कल्याण नहीं हो जाता। यह कार्य तो कोई भी कर सकता है। वैसे जिनका यह व्यवसाय है उन्हें ही वैसा करना शोभा देता है।
२.जिस व्यक्ति के परमपिता विष्णु की कृपा दृष्टि है हो जाती है उसके लिए तीनों लोक अपने ही घर के समान है। जिस पर प्रभु का स्नेह रहता है उसके सब कार्य स्वयं सिद्ध जाते हैं।
३.कलियुग में दस हजार वर्ष व्यतीत होने पर भगवान विष्णु पृथ्वी को त्याग देते हैं। पांच हजार वर्ष के बाद गंगाजल पृथ्वी को छोड़ देता है और ढाई हजार वर्ष व्यतीत होने पर ग्राम देवता पृथ्वी का त्याग कर देते हैं।
4.हर मनुष्य को सभी विधाओं में निपुण होना चाहिऐ। बडे लोगों से विनम्रता, विद्वानों से श्रेष्ठ और मधुर ढंग से वार्तालाप का तरीक सीखना चाहिए। जुआरियों से झूठ बोलना और कुशल स्त्रियों से चालाकी का गुण सीखना चाहिए।

One Response to “चाणक्य नीति:भगवान् की कृपा हो तो तीनों लोक घर समान”

  1. bahut hi achha lekh hai,kuch gyan le kar ja rahi hun.

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