रहीम के दोहे:अपने भक्त पर कृपा करते भगवान्
मन से कहाँ रहीम प्रभु, दृग सो कहाँ दिवान
देखि दृगन जो आद्रै, मन तेहि हाथ विकान
कवि रहीम कहते हैं की केवल मन और मात्र नयनों से प्रभु कहाँ दीवाने होते हैं, नेत्रों से प्रभु का रूप निहारकर जो सम्मान करता है मन उसी पर न्योछावर हो जाता है।
भावार्थ-परमात्मा उसी पर अपनी कृपा करते है जो प्रभु की मूरत को निहारकर पूरे सम्मान भाव से भक्ति करता है उन पर अपनी भक्ति न्योछावर करते हैं
मनिसिज माली की उपज, कहि रहीम नहीं जाय
फल श्यामा के उर लगे, फूल श्याम उर आय
कविवर रहीम कहते हैं कि कामदेव रूपी माली की पैदावार का वर्णन नहीं किया जा सकता। राधा के ह्रदय पर फल लगे हुए है उसके फूल श्याम के हृदय पर उगे हैं।
Filed under: Deepak bharatdeep, E-patrika, blogger, education, friends, global dashboard, hindi, hindi megzine, hindi sahitya, rahim, web bhaskar, web dunia, web duniya, web jagran, web panjab kesri, web patrika, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप., शब्द, संस्कार, सत्संग, समाज, हिंदी साहित्य