१.।इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस्तिष्क में और बिच्छू की पुँछ में-पर इन सबसे अलग दुर्जन और कपटी मनुष्य के हर अंग में विष होता है। उसके मन में विद्वेष,वाणी में कटुता और कर्म में नीचता का व्यवहार जहर बुझे तीर की तरह दूसरे को त्रास देते हैं।
२.औषधि, धर्म,धन, धान्य, और गुरु के मार्गदर्शन वाक्य-इन पांच वस्तुओं का संग्रह अवश्य करें। जो व्यक्ति इनका संचय नहीं करता वह अपने जीवन की सार्थक नहीं बना सकता। लेकिन इन पांच वस्तुओं का उपयोग भी बहुत सोच समझ कर करना चाहिऐ वरना हानि भी हो सकती है।
३.हर मनुष्य को सभी विधाओं में निपुण होना चाहिऐ। बडे लोगों से विनम्रता, विद्वानों से श्रेष्ठ और मधुर ढंग से वार्तालाप का तरीक सीखना चाहिए। जुआरियों से झूठ बोलना और कुशल स्त्रियों से चालाकी का गुण सीखना चाहिए।
४.मनुष्य को ऐसे कर्म करना जिससे उसकी कीर्ति सब और फैले। विद्या, दान, तपस्या, सत्य भाषण और धनोपार्जन के उचित तरीकों से कीर्ति दसों दिशाओं में फैलती है।
5.अपना जीवन शांतिपूर्वक बिताने के लिए हर मनुष्य को धर्म-कर्म का अनुष्ठान करते रहना चाहिऐ। वह घर मुर्दाघर के समान हैं जहाँ धर्म-कर्म या यज्_ंज-हवन नहीं होता। जहाँ वेद शास्त्रों का उच्चारण नहीं होता, विद्वानों का सम्मान नहीं होता और यज्_ंज-हवन से देवताओं का पूजन नहीं होता ऐसे घर, घर न रहकर शमशान के समान होता है।
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