रहीम के दोहे:बैर,प्रेम और यश कोई साथ लेकर पैदा नहीं होता

यह रहीम निज संग लै, जनमत जगत न कोय
बैर, प्रीति, अभ्यास, जस, होत होत ही होय

कविवर रहीम कहते हैं की परस्पर बैर-भाव, प्रेम, अभ्यास और यश करते-करते ही जीवन में अर्जित होते हैं, इनकी अपने जन्म के साथ लेकर संसार में कोई मनुष्य उत्पन्न नहीं होता.

भीत गिरी पाखान की, अररानी वहि ठाम
अब रहीम धोखो यहै, को लागे कही काम

कविवर रहीम कहते हैं कि पाषाण की दीवार ढह गयी, अरर शब्द के साथ उसी स्थान पर गिर गयी, इ अब यह धोखा है कि कौन व्यक्ति किस काम में लगे.

भावार्थ-यह सारा संसार एक धोखा है कब किसका जीवन नष्ट हो जाये पता नहीं इसलिए अपने दिमाग में यह बात ध्यान रखते हुए ही अपना कर्म करना चाहिए कि किसी को दुख न पहुंचे .