संत कबीर वाणी: पराई स्त्री से प्रेम करना लहसुन खाने के समान


पर नारी का राचना, ज्यूं लहसुन की खान
कोने बैठे खाईये, परगट होय निदान

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि पराई स्त्री के साथ प्रेम करना, जैसे लहसुन का खाना है. चाहे उसे किसी स्थान में बैठकर खाईये, अंत में वह प्रकट होकर ही रहेगा अर्थात गंध के कारण वह छिपाए नहीं छिपेगा.

पर नारी पैनी छुरी, विरला बांचे कोय
कबहूँ छेडि न देखिये, हसी हंसी खावे रोय

संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि पर नारी पैनी छुरी के समान है, इससे कोई विरला ही बच पाता है, और कभी भी उससे छेड़-छाड़ मत करो, वह हंस-हंस कर या रोकर दोनों प्रकार से खाती है.

निज स्वारथ के कारनै, सेव करे संसार
बिन स्वारथ भक्ति करे, सो भावै करतार

कबीरदास जी कहते है की इस संसार में जो भी सेवा होती है वह बिना कारण नहीं होती, उसके पीछे अपनी कुछ भलाई भी छिपी होती है, परन्तु बिना स्वारथ और निष्काम से जो भक्ति और सेवा होती परमात्मा को वही पसंद है.
नोट-रहीम, चाणक्य, कबीर और कौटिल्य की त्वरित पोस्टें नारद और ब्लोगवाणी पर अभी उपलब्ध हैं, अत: वहाँ देखने का प्रयास करें.

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टिप्पणियाँ

  • RAVINDRA.PRABHAT  On 08/12/2007 at 14:49

    भाई, संत कवीर को पढ़ना किसको नही भायेगा , चलिए इसी बहाने कुच्छ अच्छी चीजें आंखों को सुखद एहसास तो दे जाते हैं .

  • BINOD PRASAD  On 25/07/2009 at 13:39

    satya hai bhai satya hai. kabir ji ki vaani aaj ke is daur me bhi puri trah sach hai.

  • gsyadav  On 26/07/2009 at 13:00

    pl. send the thout of chanakya nities ………

  • D.k. Malviya  On 11/08/2009 at 19:09

    Kawir ji ki a rachna man ko tuch karti hai bhaie

  • vikas das  On 05/09/2009 at 22:09

    saheb bandgi saheb

  • pradeep  On 12/09/2009 at 20:56

    kadva such hai

  • mehtab singh jat  On 26/09/2009 at 10:11

    achchha h

  • santosh  On 03/03/2010 at 13:18

    Sach to hai per ye dil mange morrrrrrrrrr

  • sambhaji kawde  On 23/04/2010 at 11:58

    sant kabir was very great sant

  • Vikas das  On 28/04/2010 at 14:57

    Saheb Bandgi

    saheb ji kar kamlo me saheb Bandgi

  • chandrapal  On 06/05/2010 at 11:55

    sant kabir sabse uch star ke sant hai. hame inki bani ko apne jiwan mai utarna hai.

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