चाणक्य नीति:दान से दरिद्रता दूर होती है.

१.दान से दरिद्रता का, सदाचार से दुर्गति का, सदबुद्धि से अज्ञान और सदभावना से भय का नाश होता है.
इससे आशय यह है संपन्न लोग तो दान करते हैं पर निर्धन व्यक्ति द्वारा स्वयं कष्ट झेलते हुए भी दान किया जाता है तो वह बहुत महत्वपूर्ण होता है. ऐसे व्यक्ति की दरिद्रता बहुत जल्दी दूर हो जाती है.
२.जिस प्रकार समुद्र की ऊपर वर्षा व्यर्थ है उसी प्रकार तृप्त व्यक्ति से भोजन का अनुरोध करना व्यर्थ है.
३.,विद्वान वह है जो समय और प्रसंग के अनुकूल बात करे. कोई बात बहुत अच्छी क्यों न हो पर अगर वह समय और प्रसंग के अनुकूल न हो तो वह अप्रभावी हो जाती है.
४.धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह को देखकर तथा और रोगी व्यक्ति को देखकर मन को बहुत तकलीफ होती है और संसार से विरक्ति की भावना उत्पन्न हो जाती है, पर यह क्षणिक होता है और यदि यह भावना स्थिर हो जाये तो मनुष्य के मन को कभी संताप ही न हो
५.इस पृथ्वी पर रहते हुए दान, तप, शूरता, वीरता,विद्वता , सुशीलता, और कुशलता पर कभी अहंकार नहीं करना चाहिऐ क्योंकि इस पृथ्वी पर एक से बढ़कर लोग हुए हैं और अपने सदगुणों की वजह से अब भी जाने जाते हैं.

One Comment

  1. Posted 20/11/2007 at 08:17 | Permalink

    सही विचार।।


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