जब मैं अपने सभी ब्लोग पर पाठकों की संख्या देखता हूँ तो चक्कर में पड़ जाता हूँ, क्योंकि अधिकतर ब्लॉगों पर संख्या १०० से ऊपर निकल जाती है, चाहे मैं पोस्ट करूं या नहीं. पिछले कई दिनों से इस बढ़ती संख्या की वजह से उन पर यह सोचकर लिखता हूँ कि नियमित से अगर वह पढ़ रहें है तो आखिर मुझे क्यों न लिखना चाहिए. स्वभाव से मैं जिज्ञासु और कुछ कर गुजरने की इच्छा वाला व्यक्ति हूँ. इसलिए यह देखता रहता हूँ कि किस किस्म की रचनाएं उनके द्वारा देखी जा रहीं है और वह किस तरह मेरे ब्लोग पर आते हैं. मेरे ब्लोग कितनी वेब साइटों पर लिंकित हैं और कैसे पढे जा रहे हैं इसे मैं निरंतर देखता हूँ. खासतौर से वर्डप्रेस के ब्लोग इस मामले में मुझे बहुत सारी जानकारी देते हैं क्योंकि उसमें मैंने केटेगरी और टेग अधिक रखे हुए हैं.
मुझे यह पता नहीं कि ब्लाग पर लिखने वालों के क्या अनुभव हैं पर एक बात मेरी समझ में आ गयी है कि यह भी एक वेब साईट की तरह हैं. मैंने जो अंग्रेजी में इन पर केटेगरी या टेग अपनी पोस्ट दिए हैं वह जब सर्च पा डालता हूँ तो उस विषय बनी वेब साईट के बाद मेरे ब्लोग वहाँ दिखाई देते हैं, और हिन्दी में देवनागरी में डालने पर तो विकिपीडिया के बाद मेरे ब्लोग आ जाते हैं. उदाहरण के लिए अगर मैं चाणक्य, कबीर या रहीम लिखता हूँ तो विकिपीडिया के बाद मेरे ब्लोग आ जाते हैं. वैसे यह हमें मालूम है कि यह वेब साईट नहीं है पर जो पढ़ने वाले हैं उनके लिए यह एक वेब साईट की तरह हैं. जब लोग हिन्दी टूल से अपने शब्द इन सर्च इंजिनों में डालेंगे तो जो हमने टेग या केटेगरी अपनी पोस्ट में लगाते हैं वह उनके सामने ब्लोग ला खडा कर देंगे.
इसलिए जो लेखक अपनी रचनाओं के लिए इन ब्लोग का इस्तेमाल करेंगे उनको आगे बहुत पढ़ने वाले मिलेंगे.
जब मैं सर्च पर जाकर हिन्दी और अंग्रेजी में शब्द रखता हूँ और मेरे ब्लोग मेरे सामने आ जाते हैं तो मुझे खुद पर यकीन नहीं होता कि मेरा लिखा अंतर्जाल पर इस तरह फ़ैल चुका है. इसलिए लिखते समय मेरे दिमाग में यही विचार रहता है कि ऐसा लिखा जाये जो बहुत समय तक नवीनता का बोध लिए हो. बस बात वहीं आकर अटकती हैं कि लोगों को हिन्दी टूल के बारे में बताया जाये ताकि अपने सर्च में टूल से हिन्दी देवनागरी के शब्द पोस्ट करें.
ऐसा नहीं है कि लोग कर नहीं रहे पर उनकी संख्या कम है. मैंने अपने दो मित्रों को हिन्दी टूल बताया और जब इसका उपयोग किया तो उनका मत था कि अभी इंटरनेट पर काम करने वाले लोगों को इस बारे में अधिक पता नहीं है. उन्होने कुछ जगह अपने दिवाली की बधाई हिन्दी भाषा में भेजी तो उनसे पूछा गया कि आप ऐसे हिन्दी कैसे लिखते हैं जो हमारी पढ़ने में आती है. इसलिए मेरा मानना है कि अंतरजाल पर जो हिन्दी लिख रहे हैं वह अपने लोगों को ब्लोग बनाने के साथ हिन्दी दूल के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करें.
इधर मैंने कुछ ब्लोग देखें हैं जिनमें कई युवा लेखक इसका उपयोग अपनी साहित्यक रचनाओं के लिए करना चाहते हैं और उनकी रचनाओं में जो पुट है उसको देखते हुए मुझे लगता है कि वह लोग इस विधा को बहुत आगे तक ले जाने वाले हैं. उससे भी अधिक जिसकी कल्पना इसके आविष्कार करने वालों ने भी नहीं की होगी. वैसे भी मैं आशावादी हूँ और निराशावादिता का मेरा जीवन मैं कोई स्थान नहीं है.इसलिए जो इस पर लिख रहे हैं उन्हें निराश नहीं होना चाहिऐ
3 Comments
सहीं कह रहे हैं भाई, वैसे आपकी लेखनी में दम है दीपक जी इसीलिए लोग 100 से उपर आ रहे हैं ।
आप के लेख से अच्छी जानकारी मिली ।धन्यवाद।
अच्छी जानकारी के लिए शुक्रिया