ओम शांति फिल्म में अपनी मजाक उडाये जाने से भारतीय फिल्मों के पुराने अभिनेता कलाकार मनोजकुमार आज के तथाकथित सुपर स्टार शाहरुख खान और निदेशिका फराह खान से बहुत नाराज हैं। मनोजकुमार की नक़ल करते हुए इस फिल्म में उनका मजाक उडाया गया है और उन्होने इस मामले को सिने आर्टिस्ट एसोसियेशन में ले जाने की धमकी दी है।
हम थोडी देर के लिए तुलना करें तो शाहरुख खान आज के सशक्त प्रचार माध्यमों की वजह से लोगों को याद कराये जाते हैं कि वह इस देश के सुपर स्टार हैं जबकि मनोजकुमार तो बिना याद कराये ही लोगों के दिमाग में आज भी पुराने सुपर स्टार हैं। शाहरुख़ खान तो अभिनेता हैं और मनोजकुमार कलाकार हैं। अभिनेता और कलाकार में फर्क होता है। अभिनेता तो फिल्म में किसी तय पात्र का अभिनय करता है और कलाकार उस पात्र को जीवन देता है। अगर हम पुराने अभिनेताओं में देवानंद, मनोजकुमार, राजेंद्र कुमार,जानीवाकर और राजेश खन्ना की फिल्में देखे तो लगता है कि उनकी जगह और कोई उस फिल्म में होता तो उस पर फिट नहीं बैठता। सबके संवाद प्रेषण की अपने एक शैली थी और ऐसा लगता था कि वह वास्तव में वह पात्र जी रहे हैं। जिस फिल्म में शाहरुख़ होते हैं अगर उसमें सलमान खान भी हों तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता। इन सबके चेहरे सपाट हैं और पात्र के अनुसार संवाद तो बोलते हैं पर चेहरे पर वैसी प्रतिक्रिया नहीं होती। नये कलाकारों में कई अभिनेता तथाकथित रूप से सुपर स्टार जरूर हैं पर वह मनोजकुमार जैसे कलाकार से अभी कोसों दूर हैं। यही कारण हैं कि शोले, दीवार, सन्यासी, जंजीर, उपकार, पूरब पश्चिम, रोटी कपडा और विदाई जैसी फिल्में जिनको मील का पत्थर कहा जा सकता है अब नहीं बनती।
आज भी मिमिक्री करने वाले पुराने महान कलाकारों की नक़ल करते हैं यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उनके बाद के कलाकारों के पास अभिनय और संवाद की अपनी कोई शैली नहीं है। अपनी धमाचौकडी में मग्न कलाकारों और निदेशकों को यह होश नहीं रहता कि पुराने कलाकारों की नक़ल कर रहे हैं तो कम से कम उनसे पूछ लें या बता दें। यह केवल इस बार ही नहीं हुआ,पहले भी हो चुका है जब देवानंद की नक़ल करने वाला उनका हमशकल कलाकार जब उनसे मिलने पहुंचा तो उन्होने थप्पड़ जड़ दिया क्योंकि वह फिल्मों में उनकी संवाद शैली की नक़ल करता था। उस समय बहुत शोर मचा था कि देवानंद जी को यह नहीं करना चाहिए था पर उन्होने इस बारे में कोई सफाई नहीं दी थी। अब मनोजकुमार जी की नाराजगी से यह पता लगता है कि इन नये लोगों द्वारा पूर्व सोचना या अनुमति न लेना उनका अपमान है। अगर वह इसकी अनुमति लेते तो शायद वह सहर्ष अनुमति देते और जब लोगों को यह पता लगता तो थोडा उनका सम्मान और बढ़ता। क्या एक पुराने कलाकार का यह अधिकार नहीं बनता की नये कलाकार से कुछ सम्मान पा ले।
मुझे इस बात से तकलीफ नहीं हुई कि उनका मजाक उडाया गया है बल्कि उन्हें बाद में इससे जो दुख पहुंचा है उससे तकलीफ है। वह एक महान कलाकार हैं और उस समय के सुपर स्टार हैं जब टीवी और रेडियो पर उनका नाम भी नहीं होता था पर लोग लेते थे और आज भी याद करते हैं। वैसे फराह खान और शाहरुख खान ने इसके लिए उसने माफी मांगी है। वैसे अगर वह लोग चाहते हैं कि अपनी गलती का प्रायश्चित किया जाये तो उनका सार्वजनिक रूप से सम्मान करें. आज के अभिनेता और निदेशक खूब पैसा कमा रहे हैं और अगर कुछ पैसा उनके सम्मान पर खर्च हो जायेगा को कौनसी बड़ी बात है, आखिर इस युग में भी अपनी फिल्म हिट कराने के चक्कर में उनको पुराने कलाकार के नाम की जरूरत पडी है. व्यवसायिक दृष्टि से भी किसी का नाम इस्तेमाल करने के लिए उसे पैसा देना चाहिऐ-अभिनेता खुद भी अनेक उत्पादों में अपना नाम और फोटो देने के लिए पैसे तो लेते ही होंगे।
वैसे इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पैसे के मामले में कलेक्शन तो अच्छा कर लिया होगा पर लोगों के नजरों में कोई खास फिल्म नहीं है. भारत में आम आदमी सफल फिल्म उसे मानता है जिसे दुबारा देखा जाये और जिन लोगों ने यह फिल्म देखी है वह इसे इस लायक नहीं मानते कि दोबारा देखा जाये. फिर मनोज कुमार की जो छबि इस देश में उसे देखते हुए इस फिल्म के प्रति लोगों के दिमाग में रहा-सहा उत्साह भी जाता रहेगा।
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