गरीबी अपना वजूद नहीं खोती

देश में कई लोग अभी भी
टाँगे और बैलगाडी चलाते
कई जगह हाथ रिक्शा भी
खींचे हुए गरीब पसीना बहाते
कई लोगों ने उनकी तस्वीर कैनवास पर
उतारकर जमाने भर को दिखाई
और खूब ख्याति पाई
भले ही गरीब को निजात नहीं दिलाते
पर बडे हमदर्द कहलाते

कुछ ने लिखे लंबे-लंबे उपन्यास
कोई आयेगा पढ़कर
करेगा तुम्हारी मदद दिलाई आस
लिखने वालों के नाम पर ढेर सारे
इनाम आ जाते
पर गरीब फिर भी गरीब रह जाते

शायद बनाने वाले ने गरीब
बनाये इसलिए कि
अमीरों के काम आ सकें
और उनकी गरीबी पर
दिखाई हमदर्दी पर
बुद्धिमान अपना बाजार सजा सकें
इसलिए गरीबी हटाओ के नारे से
गूंजता है धरती और आकाश
गरीब होता दर-ब-दर
पर वह अपना वजूद नहीं खोती
वहाँ राज्य करती है
जहाँ गरीब अपना वजूद ढूँढने जाते

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