चाणक्य नीति:अपने घर की बात गुप्त रखें

१.बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने धन की हानि, अपने मानसिक संताप, अपने घर-परिवार के सदस्यों के दोष तथा  किसी दुष्ट द्वारा अपने पर किये गए प्रहार और अपमान की भूलकर किसी से भी चर्चा किसी अन्य व्यक्ति से चर्चा न करे. इन सब बातों को यथासंभव गुप्त रखना चाहिए.
२.बुद्धिमान पुरुष को भय से तब तक डरना चाहिए जब तक वह सामने नहीं आ जाता. जब वह सामने आ जाता है तो उसका सामना करने के लिए मनस्थिति बना लेनी चाहिऐ.
३.बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिऐ  कि वह अपने अपनी स्थिति  पर विचार करता रहे कि उसके कितने मित्र है, उसका समय कैसा है, उसका निवास कैसा है और उसकी आय कितनी है और व्यय कितना है.
४.बुद्धिमान को चाहिऐ कि वह अपनी स्त्री से ही संतोष करे चाहे वह रूपवती हो अथवा साधारण, वह सुशिक्षित हो अथवा निरक्षर. इसी प्रकार  को जो भोजन प्राप्त हो जाये, उसी से संतोष करना चाहिऐ. आजीविका से प्राप्त धन के संबंध में भी विचार करना चाहिए.
५.बुद्धिमान व्यक्ति  को स्वाध्याय करते रहना चाहिए और शास्त्रों के अध्ययन, प्रभु के नाम का स्मरण और दान करने से कभी संतोष नहीं करना चाहिए. 

One Comment

  1. bal kishan
    Posted 04/11/2007 at 11:01 | Permalink

    बिल्कुल सही कहा आपने. “घर का भेदी लंका ढाये.”


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