क्रिकेट में संयत व्यवहार रखना आवश्यक

भारत और आस्ट्रेलिया की बीच हाल ही में संपन्न श्रंखला में आस्ट्रेलिया के खिलाड़ी साइमंड पर भारतीय दर्शकों द्वारा नस्लभेदी टिप्पणियों और श्रीसंत के व्यवहार की बहुत चर्चा रही है. वैसे देखा जाये तो इन दोनों मामलों में कोई दम नहीं है क्योंकि इस मामले में आस्ट्रेलिया के खिलाडी अधिक बदनाम रहे हैं. मैदान के बाहर भले ही वह अन्य देशों के खिलाडियों से मित्रवत व्यवहार करते हैं पर मैदान पर उनके बुर व्यवहार की सभी देशों के खिलाड़ी करते हैं और कई बार उन्हें सचिन, सौरभ और द्रविड़ जैसे खिलाडियों के साथ बदतमीजी करते देखा गया है. उनके क्षेत्र रक्षकों द्वारा बल्लेबाजों का ध्यान भंग किया जाता ताकि वह अपनी एकाग्रता खो बैठे और उसमें वह सफल भी रहते हैं.

अब पोंटिंग अगर भारतीय खिलाडियों के व्यवहार से क्षुब्ध होकर यह कह रहे हैं कि मैच रेफरी या आई सी सी आई ऐसे मामलों का नोटिस क्यों नहीं ले रही तो उन्हें यह बताना जरूरी है कि ऐसे मामलों में इन सबकी दया दृष्टि उनके देश पर ही रही है. अगर कुछ नये भारतीय खिलाड़ी उनके साथ ऐसे व्यवहार कर रहे हैं तो इसके लिए वह और उनकी टीम ही जिम्मेदार है जो कई सालों से विश्व विजेता है और उनसे नये खिलाडी प्रेरणा लेते हैं. मतलब ऐसे मामलों में वह उनके गुरु हैं और यह उनके चेले गुरु दक्षिणा में वही व्यवहार लौटा रहे हैं. प्रतिपक्षी बल्लेबाज पर फबती कसने के मामले में ऐसा कोई देश नही है जिसके खिलाड़ी अनौपचारिक रूप से आस्ट्रेलिया की शिकायत न करते हों . पोंटिंग ने भी अभी अखबार वालों के सामने ही कहा है पर उसकी शिकायत नहीं की है. पाकिस्तानी और श्रीलंकाई खिलाडियों से तो उनके झगडे तक नौबत आ जाती हैपर पुराने भारतीय खिलाड़ी उन्हें झेलते रहे पर नये भारतीय खिलाड़ी उन्हें अब पलट कर जवाब देने लगे हैं तो बुरा लग रहा है.

वैसे भारतीय खिलाडियों को अपना व्यवहार सौम्य रखना चाहिए क्योंकि इस तरह बुरा व्यवहार करने से उन पर भी तनाव आयेगा और उनके खेल पर ही बुरा असर पडेगा. अगर आस्ट्रेलिया के खिलाडी को टिप्पणी करते हैं तो उसकी लिखित शिकायत करें पर स्वयं कोई ऐसा व्यवहार न करें जिससे उनका और देश का नाम खराब हो. आस्ट्रेलिया वाले इतने सालों से यही कर रहे हैं भारत के महान खिलाडियों ने उनको अपने खेल से ही जवाब दिया है. यह क्रिकेट खेल है इसमें हार जीत तो चलती रहेगी पर व्यवहार से अगर छबि एक बार खराब होती है तो फिर नहीं बनती और भारतीय खिलाडियों की छबि व्यवहार के मामले में उज्जवल है. जहाँ तक सायमंड्स पर दर्शकों द्वारा नस्लभेदी टिप्पणियों का सवाल है तो इतने सारे दर्शकों में कुछ शरारती तत्व हो सकते हैं जो देश का नाम बदनाम करना चाहते है पर अधिकतर दर्शक तो ऐसा करने की सोच भी नही सकते. वैसे भी क्रिकेट को भद्रजनों का खेल कहा जाता है और मैदान पर खिलाडियों और दर्शकों के संयत व्यहार करना चाहिए

2 Comments

  1. Posted 19/10/2007 at 14:24 | Permalink

    संयत व्यहार अति आवश्यक है हर क्षेत्र में. अच्छी सलाह दी आपने.

  2. Posted 19/10/2007 at 14:46 | Permalink

    यह नया क्रिकेट है, नया जोश है…. “हम भी किसी से कम नहीं” वाली भावना जोर मार रही है… कृपया इसी विषय पर पढ़ें…
    http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2007/10/symmonds-australia-indian-cricket-team.html


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