चाणक्य नीति : दुष्टो की संगत विनाश का कारण

1. बुरे व्यवहार करने वाले कर्मचारियों (सहयोगियों ) तथा बुरे स्थान पर रहने वाले दुष्ट लोगों से मित्रता करने वाला मनुष्य का संकट में पड़कर विनाश होना निश्चित है।
2. पत्नी की मृत्यु, अपनों द्वारा अपमान, ऋण की वृद्धि, दुष्ट राजा की सेवा, दरिद्रता, दुष्टों की संगत मनुष्य का शरीर बिना आग के जलाया करती हैं।
3.नदी के किनारे के पेड, दुसरे के घर जाकर बैठने वाली स्त्री बिना मंत्री का राजा यह सब शीघ्र नष्ट हो जाते हैं।
4.निश्चित वस्तु को छोड़कर जो व्यक्ति अनिश्चित की ओर भागता है वह निश्चित से भी हाथ धो बैठता है, अनिश्चित पाने की तो वैसे भी संभावना नहीं रहती।

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