आईने में बदहवास दीपक बापू

(यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है)
अपने आईने में
हमारा शीर्ष दिखाकर
वह हिट हो जाते हैं
और हम इतनी बड़ी रचना की देह लेकर
फ्लॉप की भीड़ में बैठ जाते हैं
उनके आईने में दीपक बापू
बदहवास नजर आते हैं
कृपया पूरी रचना यहां पढें आईने में बदहवास दीपक बापू
This entry was written by
दीपक भारतदीप, posted on
05/07/2007 at 03:34, filed under
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