शाश्वत प्रेम पर एक कविता-hasya kavita

न पीडा से
न किसी चाहत से
न किसी शब्द से
वह बहता आता है
सहज भाव से
अपनी पीडाओं को भुला दो
अपनी चाहतों को छोड़ दो
अपनी वाणी को मौन दो
तब शाश्वत प्रेम
आत्मा में प्रकट हो जाता है

 पूरा यहां पढ़ें शाश्वत प्रेम पर एक कविता

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