जब पीते थे तो कोई
बुलाता नहीं था
मांगते थे तो कोई
पिलाता नहीं था
जब छोड़ दीं तो
सब बुलाते हैं
जैसे मयखाना खोल लिया हो
बोतल खोल देते हैं
जैसे अमृत घोल दिया हो
पूरी कविता यहाँ पढे मय का मायाजाल
जब पीते थे तो कोई
बुलाता नहीं था
मांगते थे तो कोई
पिलाता नहीं था
जब छोड़ दीं तो
सब बुलाते हैं
जैसे मयखाना खोल लिया हो
बोतल खोल देते हैं
जैसे अमृत घोल दिया हो
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