छोटी कविताएँ और हंसिकाएं और कुछ रुलाएं
आदमी और कुत्ते पर कविता सुनाकर
वह लोगों को हंसाते हैं
अपने नाम के आगे हंसी के बादशाह
की पदवी लगाते हैं
मुझे नहीं आती हँसी
हंसने के लिए हम चाहे
जब हंस लेते हैं
जो नही जानते हँसना
वही उनकी महफ़िल सजाते हैं
————————–
क्रिकेट टीम जब से हारी है
हमें चेन आ गया है
अब कोइ क्रिकेट की न चर्चा कर्ता
न कोइ स्कोर पूछता
न कोइ अपना ज्ञान बघारता
न कोइ चैपल कथा सुनाता
ऐसा लगता है जैसे
चमन मैं अमन आ गया है
—————–
रात के अँधेरे से वही घबरातें हैं
जिनके दिन पाप के साथ कट जाते हैं
जो जीते हैं अपने विश्वासों के साथ
उनके चेहरे अँधेरे में भी चमकते
नज़र आते हैं।
—————————-
उसने अपने घर के बाहर लगा
एस वृक्ष कटा और बना ली दुकान
अब तम्बाकू के पौच और सिगरेट
बेचकर घर चलाता है
वह और उसके ग्राहक
धुआं उराते और हुए
पर्यावरण के खराब होने
पर चिन्ता जताते हैं।
————
Filed under: kavita, meadia, shaayree, shairee, shayree, thought, vididha, चरित्र, दर्द बांटते चलो, दृष्टिकोण, नज़रिया, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब, रात-बेरात, लम्हे, व्यंग्य, शायरी, शेर-ओ-शायरी